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अमेरिका के टैरिफ प्रस्ताव से भारत की व्यापारिक स्थिति पर प्रभाव

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी ऊर्जा पर निर्भर देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने के प्रस्ताव ने वैश्विक व्यापार में नई चिंताएं पैदा की हैं। हालांकि, भारत की कई उत्पाद श्रेणियों में अमेरिका पर गहरी निर्भरता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अचानक विकल्प खोजना आसान नहीं होगा। इस लेख में अमेरिका की भारत पर निर्भरता, विभिन्न उत्पादों में भारत की स्थिति और टैरिफ प्रस्ताव की विडंबना पर चर्चा की गई है। जानें कि भारत को अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाने होंगे।
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अमेरिका के टैरिफ प्रस्ताव से भारत की व्यापारिक स्थिति पर प्रभाव

अमेरिका का टैरिफ प्रस्ताव और वैश्विक व्यापार

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी ऊर्जा पर निर्भर देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव वैश्विक व्यापार में नई चिंताएं उत्पन्न कर रहा है। यह कदम भारत जैसे निर्यातक देशों के लिए खतरा प्रतीत होता है, लेकिन व्यापार आंकड़े कुछ और ही दर्शाते हैं। अमेरिका की कई रोजमर्रा की वस्तुओं में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिससे अचानक विकल्प खोजना आसान नहीं होगा।


भारत पर अमेरिका की निर्भरता

एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में अमेरिका ने जिन उत्पाद श्रेणियों में 500 मिलियन डॉलर से अधिक का आयात किया, उनमें से कई में भारत की हिस्सेदारी आधे से अधिक रही। यह मात्रा उस महीने अमेरिका को भारत के कुल निर्यात का लगभग 6 प्रतिशत थी। इन क्षेत्रों में भारत की स्थिति इतनी मजबूत है कि भारी टैरिफ लगाने पर भी अमेरिका को तुरंत अन्य आपूर्तिकर्ता नहीं मिल पाएंगे।


भारत की मजबूत स्थिति वाले उत्पाद

घरेलू टेक्सटाइल उत्पादों में भारत की स्थिति अत्यंत प्रभावशाली है। गैर-प्रिंटेड सूती बेड लिनन में अमेरिका के आयात का लगभग 59 प्रतिशत हिस्सा भारत से आया, जिसकी कीमत लगभग 66.9 मिलियन डॉलर थी। टेबल लिनन में भारत की हिस्सेदारी 81.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। पैकेजिंग सामग्री जैसे फ्लेक्सिबल इंटरमीडिएट बल्क कंटेनर में भी भारत ने लगभग 69 प्रतिशत आपूर्ति की।


टैरिफ प्रस्ताव की विडंबना

नीतिगत स्तर पर अनिश्चितता तब बढ़ी जब अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप ने उस विधेयक का समर्थन किया है, जिसमें रूसी ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की बात है। विडंबना यह है कि 2024 में अमेरिका खुद, यूरोपीय संघ, दक्षिण कोरिया और चीन के साथ, रूसी यूरेनियम के बड़े आयातकों में शामिल रहा।


भारत की हिस्सेदारी 99 प्रतिशत

कुछ श्रेणियों में भारत की स्थिति लगभग एकाधिकार जैसी है। सितंबर में अमेरिका के कैस्टर ऑयल आयात में भारत की हिस्सेदारी 99 प्रतिशत रही। कई विशेष रसायनों और औद्योगिक इनपुट्स में भी भारत का दबदबा बना रहा, जबकि अगस्त में इन पर पहले ही 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा चुका था। खाद्य उत्पादों में भी खीरा, घेरकिन और डिब्बाबंद झींगा जैसे उत्पादों में भारत प्रमुख आपूर्तिकर्ता है।


भारत के लिए चेतावनी संकेत

हालांकि, सभी क्षेत्रों में भारत की स्थिति समान नहीं है। विग बनाने में इस्तेमाल होने वाले हेयर प्रोडक्ट्स में सितंबर में भारत की हिस्सेदारी घटकर 51 प्रतिशत रह गई, जबकि साल के पहले सात महीनों में यह 76 प्रतिशत थी। हीरे और ग्रेनाइट जैसे बड़े क्षेत्रों में गिरावट और तेज रही। यह संकेत देता है कि भारत को अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखने के लिए सतर्क रहना होगा।