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अमेरिका ने भारत को रूसी तेल पर दी गई छूट को बढ़ाने से किया इनकार

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने घोषणा की है कि भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। यह निर्णय भारत के लिए एक नई चुनौती पेश करता है, क्योंकि पहले मिली छूट से भारत ने रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने की योजना बनाई थी। अमेरिका का यह कदम रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने के प्रयासों का हिस्सा है, लेकिन इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और भारत की प्रतिक्रिया।
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अमेरिका ने भारत को रूसी तेल पर दी गई छूट को बढ़ाने से किया इनकार

अमेरिका का नया निर्णय

स्कॉट बेसेंट, जो अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी हैं, ने घोषणा की है कि अमेरिका भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अब रूस और ईरान के तेल पर लागू प्रतिबंधों को समाप्त करने की प्रक्रिया में है। भारत को पहले रूस और ईरान के तेल पर छूट मिलने से काफी राहत मिली थी, लेकिन अब अमेरिका ने एक बार फिर भारत पर दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिका में रिपब्लिकन इस निर्णय की आलोचना कर रहे हैं, उनका कहना है कि इससे रूस और ईरान को लाभ हो रहा है।


छूट का उद्देश्य

मार्च 2025 में अमेरिका ने भारत को 30 दिन की अस्थायी छूट प्रदान की थी, ताकि भारतीय रिफाइनरी पहले से लदे टैंकरों से रूसी तेल खरीद सकें। इस छूट का मुख्य उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति को बनाए रखना था, ताकि तेल की कीमतें अधिक न बढ़ें। उस समय, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर थीं.


स्कॉट बेसेंट का बयान

स्कॉट बेसेंट, ट्रेजरी सेक्रेटरी, अमेरिका:-
हम रूस और ईरान के तेल के जनरल लाइसेंस को रिन्यू नहीं करेंगे। 11 मार्च से पहले जो तेल समुद्र में था, वह इस्तेमाल हो चुका है। 


भारत को मिली राहत

इस छूट के बाद, भारत ने रूस से लगभग 3 करोड़ बैरल तेल के ऑर्डर दिए थे। रिलायंस जैसी भारतीय रिफाइनरी ने पहले रूसी कंपनियों से तेल खरीदना बंद कर दिया था, लेकिन छूट मिलने पर उन्होंने फिर से खरीदारी शुरू की। कई अमेरिकी सीनेटरों और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इस छूट की कड़ी आलोचना की।


अमेरिका के प्रतिबंधों का कारण

अमेरिकी नेताओं का कहना है कि इससे रूस को प्रतिदिन 150 अरब डॉलर का अतिरिक्त लाभ हो रहा है, जिसका उपयोग वह यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में कर रहा है। सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और चक शूमर सहित कई सीनेटरों ने ट्रंप प्रशासन से मांग की कि यह छूट तुरंत समाप्त की जाए।


अमेरिका का निर्णय

अमेरिका ने अब यह निर्णय लिया है कि प्रतिबंध फिर से लागू किए जाएंगे। रूस से तेल खरीदने की समय सीमा 11 अप्रैल तक थी, जबकि ईरान से तेल खरीदने की समयसीमा 19 अप्रैल तक थी। एक समय सीमा समाप्त हो गई है, जबकि दूसरी तीन दिन बाद समाप्त होगी। भारत समेत कई एशियाई देशों ने छूट बढ़ाने का प्रयास किया था, लेकिन अमेरिका ने इसे ठुकरा दिया है।