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अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने की छूट समाप्त करने का निर्णय लिया

अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने की छूट समाप्त करने का निर्णय लिया है, जो भारत सहित कई देशों को प्रभावित करेगा। यह छूट ईरान द्वारा हार्मुज स्ट्रेट को बंद करने के कारण दी गई थी। अब अमेरिका भारत को वेनेजुएला के तेल की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहा है। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने की छूट समाप्त करने का निर्णय लिया

अमेरिका की नई नीति

अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने की छूट को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कांग्रेस की सुनवाई में बताया कि यह छूट एक निश्चित समय के लिए दी गई थी। इसका उद्देश्य ईरान द्वारा हार्मुज स्ट्रेट को बंद करने के कारण उत्पन्न स्थिति को संभालना था, जिससे वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई।


छूट का प्रभाव

भारत सहित कई देशों ने इस छूट का लाभ उठाया और रूसी तेल खरीदने में सक्षम हुए। रूबियो ने कहा कि अमेरिका की नीति अब रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने की है, और यह छूट जल्द ही समाप्त की जाएगी। यह छूट मार्च में शुरू हुई थी और इसे दो बार बढ़ाया गया था, लेकिन अब यह 17 जून को समाप्त हो रही है।


भारत और अमेरिका के बीच समझौता

ट्रंप प्रशासन ने भारत से रूसी तेल की खरीद बंद करने का वादा लिया था, जिसके बदले अमेरिका ने भारत पर लगे अतिरिक्त 25% टैरिफ को हटा दिया था। अब अमेरिका भारत को वेनेजुएला के तेल की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहा है। वैश्विक तेल आपूर्ति में कमी के कारण भारत ने कुछ समय के लिए फिर से रूसी तेल खरीदना शुरू किया था।


छूट का कारण

फरवरी 2026 में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ, जिसके कारण ईरान ने हार्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया। इस मार्ग से लगभग 20% वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका ने मार्च 2026 में एक सीमित समय के लिए छूट दी, ताकि देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिल सके।


भारत पर संभावित प्रभाव

भारत पहले से ही सस्ते रूसी तेल का आयात करता था। युद्ध के कारण हार्मुज बंद होने से भारत को तेल की आपूर्ति में कठिनाई हुई। अमेरिका की छूट के चलते भारत ने फिर से रूसी तेल खरीदना शुरू किया। अब अमेरिका भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए प्रेरित कर रहा है।



  • भारत के लिए रूसी तेल की खरीद में कठिनाई हो सकती है।

  • भारत को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ सकती है।

  • वैश्विक तेल बाजार पर फिर से प्रभाव पड़ सकता है।

  • रूस सस्ती दरों पर तेल प्रदान करता है, जिससे उसकी आय में कमी आ सकती है।

  • यदि भारत रूस से तेल खरीद जारी रखता है, तो उसे अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।