अमेरिकी अपील कोर्ट का फैसला: क्या भारत को मिलेगा व्यापार में लाभ?

अमेरिकी अपील कोर्ट का निर्णय और भारत पर प्रभाव
अमेरिकी अपील कोर्ट का निर्णय: 29 अगस्त 2025 को, अमेरिकी अपील कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अधिकांश टैरिफ को अवैध ठहराया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को टैरिफ या टैक्स लगाने का अधिकार नहीं है। यह निर्णय अमेरिकी व्यापार नीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिसका भारत सहित कई देशों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
भारत पर संभावित प्रभाव
राजनीतिक विश्लेषक नंद गोपाल गुर्जर का मानना है कि इस फैसले का भारत की आर्थिक स्थिति पर तत्काल प्रभाव सीमित होगा। उनके अनुसार, ये टैरिफ मुख्य रूप से रूस से तेल खरीद और व्यापार असंतुलन के आधार पर लगाए गए थे, जो भारत की स्थिति को प्रभावित नहीं करते। हालांकि, यदि इन टैरिफों को हटाया जाता है, तो इससे भारत के निर्यातकों को, विशेषकर टेक्सटाइल, ज्वेलरी और फर्नीचर उद्योगों में, राहत मिल सकती है।
चीन और कनाडा पर लगाए गए टैक्स
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी अपील कोर्ट का यह निर्णय मुख्य रूप से ट्रंप द्वारा अप्रैल 2025 में लागू किए गए रेसिप्रोकल टैरिफ पर आधारित है। इसके अलावा, कोर्ट ने फरवरी 2025 में चीन, मैक्सिको और कनाडा पर लगाए गए टैक्स को भी अवैध मानते हुए रद्द कर दिया है। ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जो अब इस फैसले के बाद सवालों के घेरे में आ गया है।
निर्यातकों को संभावित राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी अपील कोर्ट के आदेश के बाद भारत और अन्य देशों पर लगाए गए कुछ टैरिफ हटाए जाते हैं, तो इससे निर्यातकों को महत्वपूर्ण राहत मिल सकती है। यह राहत उन देशों के लिए है, जिन पर ट्रंप प्रशासन ने भारी टैरिफ लगाए थे। इससे निर्यातकों का खर्च कम हो सकता है और भारत के निर्यात क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल, ज्वेलरी और फर्नीचर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
क्या ट्रंप इस फैसले को मानेंगे?
अमेरिकी अपील कोर्ट के निर्णय के बाद, ट्रंप ने इसे मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार द्वारा लगाए गए टैरिफ जारी रहेंगे। ट्रंप का कहना है कि इन टैरिफों का उद्देश्य अमेरिका के हितों की रक्षा करना था और उनका मानना है कि कोर्ट का यह आदेश अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इन टैरिफों को लागू करने का कारण विदेशी देशों से व्यापार असंतुलन और रूस से तेल खरीद थी।