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अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना: लागत में भारी वृद्धि और समय में देरी

अहमदाबाद से मुंबई के बीच चल रही बुलेट ट्रेन परियोजना में चार साल की देरी और लागत में भारी वृद्धि हुई है। वर्तमान में इसकी लागत लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये है, जो प्रारंभिक अनुमानों से 83 प्रतिशत अधिक है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने बताया कि संशोधित लागत की अंतिम स्वीकृति अभी बाकी है। परियोजना में भूमि अधिग्रहण, कानूनी मंजूरियों में देरी और बुलेट ट्रेनों के चयन में समय लगने जैसे कई कारण शामिल हैं। हाल ही में एक महत्वपूर्ण सुरंग का ब्रेकथ्रू भी हुआ है, जो परियोजना की प्रगति को दर्शाता है।
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अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना: लागत में भारी वृद्धि और समय में देरी

नई दिल्ली में बुलेट ट्रेन परियोजना की स्थिति


नई दिल्ली: देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना, जो अहमदाबाद से मुंबई के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण कर रही है, अब समय सीमा से काफी पीछे चल रही है। इस परियोजना में चार साल से अधिक की देरी के कारण लागत में भारी वृद्धि हुई है, और अब इसका अनुमानित खर्च लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह राशि प्रारंभिक स्वीकृत लागत से लगभग 83 प्रतिशत अधिक है।


इस परियोजना को पहले लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये की लागत पर मंजूरी दी गई थी। बढ़ती लागत और देरी के मुद्दों पर सरकार की 'प्रगति' पहल के तहत आयोजित एक ब्रीफिंग में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई।


संशोधित लागत की स्वीकृति का इंतजार

संशोधित लागत को अंतिम मंजूरी अभी बाकी


ब्रीफिंग में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एवं सीईओ सतीश कुमार ने बताया कि परियोजना की संशोधित लागत के लिए अंतिम स्वीकृति अभी प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन वर्तमान अनुमान इसे लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये के आसपास रखता है। उन्होंने कहा कि लागत के पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है और इसे एक-दो महीनों में अंतिम रूप दिया जाएगा।


देरी और लागत में वृद्धि के कारण

देरी और लागत बढ़ने की प्रमुख वजहें


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना में देरी और लागत में वृद्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जैसे:



  • भूमि अधिग्रहण में देरी,

  • कानूनी और वैधानिक मंजूरियों में समय लगना,

  • और बुलेट ट्रेनों के रोलिंग स्टॉक के अंतिम चयन में हुई देरी।


रेलवे के अनुसार, 30 नवंबर तक परियोजना की भौतिक प्रगति 55.6 प्रतिशत और वित्तीय प्रगति 69.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस अवधि में कुल 85,801 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रेलवे मंत्रालय के कार्यों की समीक्षा के दौरान इस परियोजना को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए थे।


निर्माण में महत्वपूर्ण उपलब्धि

निर्माण में बड़ी उपलब्धि, सुरंग का ब्रेकथ्रू


इस बीच, परियोजना में एक महत्वपूर्ण निर्माण उपलब्धि भी हासिल हुई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से महाराष्ट्र के पालघर जिले में 1.5 किलोमीटर लंबी पर्वतीय सुरंग के अंतिम ब्रेकथ्रू का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह माउंटेन टनल-5 के ब्रेकथ्रू के रूप में दर्ज किया गया है।


रेल मंत्रालय के अनुसार, यह सुरंग पालघर जिले की सबसे लंबी सुरंगों में से एक है और विरार व बोईसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच स्थित है। मंत्रालय ने बताया कि यह महाराष्ट्र में दूसरी सुरंग का ब्रेकथ्रू है। इससे पहले ठाणे और बीकेसी (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स) के बीच 5 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग सितंबर 2025 में पूरी हो चुकी है।


परियोजना की गति और पर्यावरणीय लाभ

320 किमी/घंटा की रफ्तार और पर्यावरण को लाभ


अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरती है। इसे 320 किमी प्रति घंटे की गति से संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। कॉरिडोर को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि भविष्य में जापानी E10 सीरीज शिंकानसेन ट्रेनों का संचालन भी संभव हो, जो मौजूदा डिजाइन स्पीड से 20 किमी/घंटा अधिक रफ्तार से चल सकेंगी।


परियोजना के पूरा होने पर सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 95 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है, जिससे यह परियोजना पर्यावरण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पहले चरण का उद्घाटन सूरत से बिलीमोरा के बीच अगस्त 2027 में किया जाने की योजना है, जबकि पूरे 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के दिसंबर 2029 तक पूरा होने की संभावना है।