आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 597 करोड़ रुपये का फ्रॉड: ईडी की छापेमारी और मुख्य आरोपी का खुलासा
प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई
चंडीगढ़: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुए लगभग 597 करोड़ रुपये के फ्रॉड मामले में तेजी से कदम उठाए हैं। 12 मार्च को, ईडी ने चंडीगढ़, मोहाली, पंचकुला, गुरुग्राम और बेंगलुरु में 19 स्थानों पर छापे मारे। इसके साथ ही, फ्रॉड से जुड़े 90 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। यह कार्रवाई हरियाणा सरकार और अन्य सरकारी संस्थाओं के फंड्स के गबन से संबंधित है।
छापेमारी के स्थान
ईडी की टीम ने मुख्य रूप से बैंक के पूर्व कर्मचारियों रिभव ऋषि और अभय कुमार के घरों और कार्यालयों पर छापे मारे। इसके अलावा, फर्जी कंपनियों जैसे स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों पर भी सर्च की गई।
ज्वैलर्स जैसे सावन ज्वैलर्स और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वधवा की कंपनियों (प्रिस्मा रेजिडेंसी एलएलपी, किंसपायर रियल्टी एलएलपी आदि) के परिसर भी जांच के दायरे में आए।
जांच में सामने आए तथ्य
जांच में यह पता चला कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी विभागों के फंड्स को फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में रखना था, लेकिन आरोपियों ने बिना अनुमति के इन पैसों को हड़प लिया। फरवरी 2026 में पंचकुला में राज्य सतर्कता ब्यूरो की एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया।
पैसे को कई फर्जी कंपनियों के माध्यम से घुमाया गया। स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी फर्जी कंपनी बनाकर सरकारी धन का गलत इस्तेमाल किया गया। इसके बाद अधिकांश रकम ज्वैलर्स के खातों में भेजी गई, जहां फर्जी बिलों के जरिए सोने की खरीद दिखाई गई। कुछ राशि रियल एस्टेट में भी निवेश की गई। यह धोखाधड़ी पिछले एक साल से चल रही थी।
मुख्य आरोपी की पहचान
पूर्व बैंक कर्मचारी रिभव ऋषि को मुख्य आरोपी माना गया है, जिसने जून 2025 में इस्तीफा दिया था। उसने अपनी पत्नी दिव्या अरोरा और अन्य के खातों में पैसे ट्रांसफर किए। अभय कुमार भी इस मामले में शामिल थे। रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वधवा ने भी कथित तौर पर बड़े पैमाने पर पैसा लिया और अपनी फर्मों में लगाया।
ईडी का उद्देश्य मनी ट्रेल का पता लगाना और अपराध से प्राप्त धन को जब्त करना है। फ्रीज किए गए खातों से जांच को सरलता मिलेगी। बैंक ने पहले ही प्रभावित ग्राहकों को 645 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है। यह मामला सरकारी फंड्स की सुरक्षा और बैंकिंग सिस्टम में सख्ती की आवश्यकता को दर्शाता है। जांच जारी है और जल्द ही और कार्रवाई की जा सकती है।
