आईपीओ ट्रेडिंग में बदलाव की तैयारी, सेबी ने शुरू की समीक्षा प्रक्रिया
आईपीओ में निवेश के नियमों में संभावित बदलाव
शेयर बाजार में आईपीओ के माध्यम से निवेश करने वाले लोगों के लिए नियमों में बदलाव की संभावना है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने आईपीओ और पुनः सूचीबद्ध शेयरों की प्रारंभिक ट्रेडिंग व्यवस्था की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। सेबी का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था कई बार शेयरों की सही कीमत निर्धारित करने में बाधा उत्पन्न कर रही है.
सेबी का परामर्श पत्र और सुझाव आमंत्रण
सेबी ने इस विषय पर एक परामर्श पत्र जारी किया है और बाजार के प्रतिभागियों से सुझाव मांगे हैं। यह प्रस्ताव विशेष रूप से लिस्टिंग के दिन होने वाले प्री-ओपन कॉल ऑक्शन सत्र से संबंधित है.
प्री-ओपन कॉल ऑक्शन सत्र की प्रक्रिया
वर्तमान में, आईपीओ और पुनः सूचीबद्ध शेयरों के लिए सुबह 9 बजे से 10 बजे तक एक घंटे का प्री-ओपन कॉल ऑक्शन सत्र आयोजित होता है। इस दौरान केवल सीमित मूल्य वाले आदेश स्वीकार किए जाते हैं, जबकि बाजार मूल्य वाले आदेशों की अनुमति नहीं होती.
मौजूदा व्यवस्था की समस्याएं
सेबी ने बताया कि प्राप्त सुझावों में यह बात सामने आई है कि मौजूदा डमी प्राइस बैंड और आधार मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया कई मामलों में कीमतों को कृत्रिम रूप से दबा रही है। इसके कारण सामान्य ट्रेडिंग शुरू होने के बाद शेयरों में अचानक खरीदारी का दबाव बढ़ जाता है, जिससे ऊपरी सर्किट जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
खरीद आदेशों का खारिज होना
एक मामले में प्री-ओपन सत्र के दौरान लगभग 90 प्रतिशत खरीद आदेश केवल इसलिए खारिज कर दिए गए क्योंकि वे निर्धारित मूल्य सीमा से बाहर थे। सेबी का मानना है कि ऐसी स्थिति बाजार में वास्तविक मांग और सही मूल्य निर्धारण को प्रभावित कर रही है.
डमी प्राइस बैंड की सीमाएं
वर्तमान नियमों के अनुसार, आईपीओ वाले शेयरों के लिए डमी प्राइस बैंड आधार मूल्य से 50 प्रतिशत नीचे और 100 प्रतिशत ऊपर तक होता है। पुनः सूचीबद्ध शेयरों के लिए यह सीमा 85 प्रतिशत नीचे और 50 प्रतिशत ऊपर तक होती है, जबकि छोटे और मध्यम उद्योगों के आईपीओ के लिए यह दायरा 90 प्रतिशत ऊपर और नीचे तक निर्धारित है.
बाजारों में मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया
विभिन्न शेयर बाजार वर्तमान में अपने स्तर पर इन सीमाओं में बदलाव करते हैं। यदि विभिन्न बाजारों में अलग-अलग कीमतें सामने आती हैं, तो कारोबार की मात्रा के आधार पर एक साझा संतुलित मूल्य निर्धारित किया जाता है.
ट्रेडिंग प्रक्रिया में संतुलित मूल्य का महत्व
सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आईपीओ के दौरान प्री-ओपन सत्र में कोई संतुलित मूल्य निर्धारित नहीं हो पाता, तो सामान्य कारोबार में निर्गम मूल्य को आधार मानकर ट्रेडिंग शुरू होती है. पुनः सूचीबद्ध शेयरों में यदि कीमत तय नहीं होती है, तो सभी आदेश रद्द कर दिए जाते हैं और अगले कारोबारी दिन वही प्रक्रिया दोहराई जाती है.
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में आईपीओ बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी में तेजी आई है। ऐसे में प्रारंभिक ट्रेडिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है.
नियमों की समीक्षा की आवश्यकता
सेबी का कहना है कि बदलती बाजार परिस्थितियों और निवेशकों के व्यवहार को ध्यान में रखते हुए मौजूदा नियमों की पुनः समीक्षा करना आवश्यक हो गया है, ताकि शेयरों की वास्तविक कीमत को बेहतर तरीके से निर्धारित किया जा सके और बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को कम किया जा सके.
