आरबीआई की बैठक: ब्याज दरें स्थिर, महंगाई पर चिंता बढ़ी
नई दिल्ली में आरबीआई की महत्वपूर्ण बैठक
नई दिल्ली: क्या लोन की ईएमआई में वृद्धि होगी या राहत मिलेगी? महंगाई में वृद्धि की संभावना है? इन सवालों के उत्तर देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की हालिया बैठक आयोजित की गई। इस बैठक पर देशभर के व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और अर्थशास्त्रियों की नजरें थीं।
रेपो रेट में कोई परिवर्तन नहीं
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक के निर्णयों की घोषणा करते हुए बताया कि बैंक ने अपनी प्रमुख ब्याज दर 'रेपो रेट' को 5.25% पर बनाए रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, बैंक ने अपने नीतिगत रुख को 'न्यूट्रल' रखा है, जिसका अर्थ है कि भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार ब्याज दरों में बदलाव किया जा सकता है।
इस बैठक का आम जनता पर सीधा प्रभाव पड़ता है। चूंकि रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा गया है, इसलिए बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ाने का तत्काल दबाव नहीं होगा। इसका लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा, खासकर जिनके पास होम लोन, कार लोन या व्यक्तिगत लोन हैं। इस निर्णय पर MPC के सभी सदस्यों ने सहमति जताई है।
जीडीपी ग्रोथ का अनुमान
आरबीआई ने भारत की आर्थिक विकास दर यानी रियल जीडीपी ग्रोथ के पूर्वानुमान में संशोधन किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था धीमी गति से आगे बढ़ेगी।
ऊर्जा की बढ़ती कीमतें: वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से लागत में इजाफा हो सकता है।
कमजोर मानसून: कुछ क्षेत्रों में मानसून की स्थिति कमजोर रहने की आशंका है, जिससे कृषि और ग्रामीण मांग प्रभावित हो सकती है।
महंगाई पर चिंता
जहां जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाया गया है, वहीं महंगाई को लेकर आरबीआई की चिंताएं बढ़ गई हैं। केंद्रीय बैंक ने भविष्य में कीमतों में वृद्धि की संभावना जताई है और अपने पूर्वानुमानों में संशोधन किया है।
| समयावधि (Period) | पुराना अनुमान (Earlier Forecast) | नया अनुमान (New Forecast) |
| वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) | 4.60% | 5.10% |
| FY27 की चौथी तिमाही (Q4) | 4.70% | 5.40% |
इस संशोधन का अर्थ है कि आने वाले समय में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें अपेक्षा से अधिक बढ़ सकती हैं, लेकिन पिछले वर्षों की अत्यधिक महंगाई की तुलना में यह अब भी नियंत्रण में रहने की उम्मीद है।
विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये की स्थिति
विदेशी मुद्रा भंडार: आरबीआई ने बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में है, जो लगभग 68.23 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। यह राशि देश के लगभग 11 महीनों के आयात खर्च को कवर करने के लिए पर्याप्त है।
रुपये की स्थिति: आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि रुपये की कीमत का कोई निश्चित लक्ष्य नहीं है और इसे बाजार की स्थितियों के अनुसार चलने दिया जाएगा।
निवेशकों के लिए घोषणाएं: विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs): सरकारी बॉंड पर मिलने वाली टैक्स राहत को बढ़ा दिया गया है।
NRI और OCI निवेश: गैर-आवासीय भारतीयों के लिए निवेश की सीमाओं को बढ़ाया गया है।
कुल मिलाकर, आरबीआई की नई नीति संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। ब्याज दरों को स्थिर रखकर केंद्रीय बैंक ने आर्थिक विकास को समर्थन दिया है, जबकि महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के प्रति सतर्कता बरती है।
