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आरबीआई गवर्नर ने वित्तीय स्थिरता और बाजार सुधार पर जोर दिया

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में एम्स्टर्डम में एक सम्मेलन में भारत की आर्थिक स्थिति और वित्तीय बाजारों की मजबूती पर चर्चा की। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती को उजागर किया और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही। मल्होत्रा ने ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और उच्च सार्वजनिक ऋण के मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की।
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आरबीआई गवर्नर ने वित्तीय स्थिरता और बाजार सुधार पर जोर दिया

आरबीआई गवर्नर का बयान

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय बैंक भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद के साथ वित्तीय बाजारों को सुदृढ़ करने, भागीदारी बढ़ाने और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करेगा।


मल्होत्रा ने एम्स्टर्डम में आयोजित एक सम्मेलन में यह बात कही, जो वैश्विक वित्तीय प्रणाली की उच्च अनिश्चितता और चुनौतियों के समय में हो रहा था। उन्होंने बताया कि इसका प्रभाव न केवल वास्तविक क्षेत्र पर, बल्कि वित्तीय बाजारों पर भी पड़ रहा है।


सम्मेलन का उद्देश्य

यह सम्मेलन फिक्स्ड इनकम मनी मार्केट एंड डेरिवेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफआईएमएमडीए) और प्राइमरी डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (पीडीएआई) की 25वीं वार्षिक बैठक के तहत आयोजित किया गया।


गवर्नर ने कहा कि शुल्क, व्यापार प्रतिबंधों और औद्योगिक नीतियों के कारण वैश्विक व्यवस्था में विभाजन हो रहा है, जिससे न केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि पूंजी के प्रवाह में भी बाधाएं आ रही हैं।


ऊर्जा कीमतों में वृद्धि

मल्होत्रा ने उल्लेख किया कि पश्चिम एशिया में हाल के तनावों के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो मुद्रास्फीति का दबाव और बढ़ सकता है।


हालांकि, उन्होंने भारत की आर्थिक मजबूती पर भी प्रकाश डाला, जो घरेलू मांग और सार्वजनिक निवेश के कारण बनी हुई है।


आर्थिक वृद्धि की दर

गवर्नर ने बताया कि वित्त वर्ष 2021-25 के दौरान भारत की औसत आर्थिक वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह 7.6 प्रतिशत और 2026-27 में 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।


उन्होंने कहा कि कंपनियों के बहीखातों में सुधार हुआ है और उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।


वित्तीय बाजारों की स्थिति

पिछले दो वर्षों में भारतीय कंपनियों ने पूंजी बाजारों के माध्यम से धन जुटाने की प्रक्रिया को मजबूती प्रदान की है। मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय वित्तीय बाजार पिछले कुछ वर्षों में परिपक्व हुए हैं, जो नीतिगत सुधारों का परिणाम है।


हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय बाजारों को और मजबूत करने के लिए और प्रयासों की आवश्यकता है।


भविष्य की योजनाएं

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वे वित्तीय बाजारों को सुदृढ़ करने, भागीदारी बढ़ाने और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे।


उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक नीतिगत कदम उठाने के लिए तैयार है।


वैश्विक आर्थिक चुनौतियाँ

मल्होत्रा ने वैश्विक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में उच्च सार्वजनिक ऋण चिंता का विषय बना हुआ है।


उन्होंने यह भी बताया कि महामारी के बाद राजकोषीय संतुलन की ओर वापसी कठिन हो गई है, क्योंकि सरकारें अभी भी खर्च बढ़ा रही हैं।