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इंडक्शन कुकिंग से बढ़ती बिजली की मांग: क्या है सरकार की रणनीति?

एलपीजी सिलेंडर की कमी के चलते लोग तेजी से इंडक्शन कुकिंग की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे बिजली की मांग में वृद्धि हो रही है। बिजली मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव से पीक डिमांड में 13 से 27 गीगावाट तक की बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार इस स्थिति का सामना करने के लिए नई रणनीतियाँ बना रही है, जिसमें थर्मल पावर की मेंटेनेंस को टालना और नई उत्पादन क्षमता जोड़ना शामिल है। जानें इस बदलाव का रसोई और ऊर्जा व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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इंडक्शन कुकिंग से बढ़ती बिजली की मांग: क्या है सरकार की रणनीति?

इंडक्शन कुकिंग का बढ़ता चलन

देश में एलपीजी सिलेंडर की कमी और अनिश्चितता के चलते, लोग तेजी से इंडक्शन कुकिंग की ओर बढ़ रहे हैं। यह बदलाव केवल रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली की मांग पर भी इसका प्रभाव स्पष्ट हो रहा है। बिजली मंत्रालय के अनुसार, आने वाले महीनों में यह बदलाव भारत की पीक पावर डिमांड को एक नए स्तर पर पहुंचा सकता है। सरकार और संबंधित एजेंसियां इस स्थिति का सामना करने के लिए रणनीतियाँ बना रही हैं।


इंडक्शन कुकिंग से बिजली की मांग में वृद्धि

बिजली मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यदि इंडक्शन कुकस्टोव का उपयोग इसी गति से बढ़ता रहा, तो पीक डिमांड में 13 से 27 गीगावाट तक की वृद्धि हो सकती है। कृष्ण चंद्र पाणिग्रही ने बताया कि यह मांग विशेष रूप से सुबह और शाम के समय में अधिक होगी, जब अधिकांश घरों में खाना पकाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव धीरे-धीरे शुरू हो चुका है और भविष्य में इसका प्रभाव और भी स्पष्ट होगा।


एलपीजी संकट और रसोई की बदलती तस्वीर

हाल के वैश्विक घटनाक्रम और ईरान युद्ध के प्रभाव से एलपीजी की आपूर्ति में बाधा आई है, जिसके कारण लोगों ने वैकल्पिक विकल्पों की तलाश शुरू कर दी है। इंडक्शन कुकटॉप की मांग अचानक बढ़ गई है। बाजार में इनकी कीमतों में भी हल्की वृद्धि देखी गई है। आमतौर पर 1800 रुपये में मिलने वाले बेसिक मॉडल अब थोड़े महंगे हो गए हैं। हालांकि, यह वृद्धि बहुत अधिक नहीं है, लेकिन मांग में तेजी ने बाजार की दिशा बदल दी है।


सरकार की तैयारी और रणनीति

ऊर्जा मंत्रालय इस बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, लगभग 10 गीगावाट थर्मल पावर क्षमता के मेंटेनेंस को फिलहाल टाल दिया गया है, ताकि गर्मियों में बिजली की आपूर्ति प्रभावित न हो। इसके अलावा, कुल 22 गीगावाट नई उत्पादन क्षमता जोड़ने की योजना बनाई गई है, जिसमें सोलर, हाइड्रो और बैटरी स्टोरेज शामिल हैं। यह कदम संभावित बिजली संकट को टालने के लिए उठाए जा रहे हैं।


आने वाले समय की चुनौतियाँ

भारत की मौजूदा स्थापित बिजली क्षमता 531 गीगावाट से अधिक है, जिसमें गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है। फिर भी, अचानक बढ़ती मांग नई चुनौतियाँ पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वितरण और खपत के संतुलन पर भी ध्यान देना होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इंडक्शन कुकिंग का बढ़ता चलन देश की ऊर्जा व्यवस्था को किस दिशा में ले जाता है।