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ईंधन की कीमतों में वृद्धि से आम जनता की चिंता बढ़ी

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया वृद्धि ने आम जनता के बीच चिंता बढ़ा दी है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 109.70 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि डीजल की कीमत भी बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है, जिससे परिवारों का बजट प्रभावित होगा। टैक्सी चालक और फास्ट फूड दुकानदार जैसे आम लोग इस बढ़ती लागत से परेशान हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ।
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ईंधन की कीमतों में वृद्धि से आम जनता की चिंता बढ़ी

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार दूसरी बार हुई वृद्धि ने आम लोगों के बीच चिंता का माहौल बना दिया है। हाल ही में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण लोगों को यह डर सताने लगा है कि महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है।


कोलकाता में सबसे अधिक वृद्धि

महानगरों में कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। यहां पेट्रोल की कीमत 96 पैसे बढ़कर 109.70 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 96.07 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है।


पिछली बढ़ोतरी का संदर्भ

इससे पहले शुक्रवार को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई थी। उस समय पेट्रोल की कीमत 3.29 रुपये और डीजल की कीमत 3.11 रुपये प्रति लीटर बढ़ी थी।


सरकार की नई नीति

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह चार साल में पहली बार है जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की गई है। इससे पहले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ाए गए थे, और व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में भी भारी उछाल आया है।


व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत

कोलकाता में 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत 3202 रुपये तक पहुंच गई है, जो पहले 2208 रुपये थी। इस प्रकार, एक बार में लगभग 994 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।


महंगाई का प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों से परिवहन और व्यापार की लागत में वृद्धि होगी, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ेगा। इससे आम परिवारों का मासिक बजट और अधिक प्रभावित हो सकता है।


टैक्सी चालक की चिंता

कोलकाता के न्यू गरिया क्षेत्र में रहने वाले ऐप टैक्सी चालक सुमित दास ने बताया कि वह रोजाना लगभग 150 किलोमीटर गाड़ी चलाते हैं। पहले उनका मासिक डीजल खर्च लगभग 25,500 रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 26,650 रुपये हो जाएगा।


परिवार के बजट पर असर

सुमित ने कहा कि उनकी आय नहीं बढ़ रही है, लेकिन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी चिंता बेटी की पढ़ाई का खर्च है, क्योंकि अतिरिक्त ईंधन खर्च सीधे परिवार के बजट पर असर डाल रहा है।


फास्ट फूड दुकान पर काम करने वाले की स्थिति

बेहाला में एक फास्ट फूड दुकान पर काम करने वाले 50 वर्षीय मलॉय सरदार भी बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। वह रोल, मुगलई पराठा और तले हुए खाद्य पदार्थ बनाते हैं और उनकी मासिक तनख्वाह 13,500 रुपये है।


तनख्वाह में कटौती की चेतावनी

व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि के बाद, उनके मालिक ने वेतन कम करने की चेतावनी दी है। अब जून से उनकी तनख्वाह 13,000 रुपये करने की बात कही गई है।


आय में कमी की आशंका

मलॉय सरदार का कहना है कि अगर ईंधन की कीमतें आगे भी बढ़ती रहीं, तो उनकी आय और घट सकती है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी भी कई घरों में खाना बनाने का काम करती हैं, लेकिन दो लोगों की कमाई के बावजूद परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।


कार किराये का कारोबार

कार किराये का कारोबार करने वाले संदीप कायल भी बढ़ती लागत से परेशान हैं। उनके पास चार गाड़ियां हैं, जिनमें से तीन डीजल से चलती हैं। उन्होंने बताया कि पहले एक गाड़ी से हर महीने लगभग 4500 रुपये की बचत होती थी, लेकिन अब ईंधन महंगा होने से यह घटकर करीब 3300 रुपये रह जाएगी।


व्यापक प्रभाव

आर्थिक जानकारों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव खाद्य पदार्थों, परिवहन, शिक्षा और छोटे कारोबार समेत लगभग हर क्षेत्र पर दिखाई देता है।