उत्तर प्रदेश: फ्रेंच फ्राई प्रसंस्करण का नया केंद्र
उत्तर प्रदेश की कृषि क्षमता में बदलाव
उत्तर प्रदेश, अपनी बदलती जलवायु और बढ़ते तापमान के चलते, आने वाले वर्षों में देश का प्रमुख फ्रेंच फ्राई प्रसंस्करण केंद्र बन सकता है। गुजरात की कृषि कंपनी हाइफार्म ने इस सकारात्मक बदलाव पर विश्वास जताया है।
हाइफार्म के सीईओ सुंदरराजन एस ने एक साक्षात्कार में बताया कि पिछले छह से सात वर्षों में उत्तर प्रदेश के आलू में ठोस तत्वों की मात्रा में वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण क्षेत्र का बढ़ता तापमान है।
आलू प्रसंस्करण में उत्तर प्रदेश की भूमिका
उन्होंने यह भी कहा कि अगले तीन से पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश आलू प्रसंस्करण के क्षेत्र में एक नई ताकत बनकर उभरेगा। तकनीकी दृष्टि से, गुणवत्तापूर्ण फ्रेंच फ्राई के लिए आलू में शुष्क पदार्थ का अंश 20 से 24 प्रतिशत होना आवश्यक है, जिससे वे कुरकुरे बने रहते हैं। उत्तर प्रदेश के आलू में यह स्तर पहले 17 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 19-20 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
कंपनी की विस्तार योजनाओं पर चर्चा करते हुए सुंदरराजन ने बताया कि हाइफार्म का लक्ष्य 2028 तक आलू की वार्षिक खरीद को चार लाख टन से बढ़ाकर 10 लाख टन करना है। इसके लिए कंपनी मध्य प्रदेश में 2028 और उत्तर प्रदेश में 2030 में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी।
किसानों के साथ सहयोग
वर्तमान में, हाइफार्म गुजरात के साबरकांठा और गांधीनगर में 7,000 किसानों के साथ जुड़ी हुई है। कंपनी 'बीज से बाजार तक' मॉडल पर काम करती है और अपनी आवश्यकताओं का लगभग 90-95 प्रतिशत बीज स्वयं तैयार करती है।
सुंदरराजन ने उद्योग की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान में भारतीय फ्रेंच फ्राई उद्योग मुख्य रूप से 'संताना' किस्म पर निर्भर है। इसके विकल्प के रूप में केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) की नई किस्मों 'कुफरी फ्राईसोना' और 'कुफरी फ्राईओएम' को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने इस क्षेत्र के संगठित विकास के लिए भारतीय आलू प्रसंस्करण संघ के गठन पर भी जोर दिया। 2025 में भारत से जमे हुए आलू का निर्यात 45 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.51 लाख टन के स्तर को पार कर गया है।
