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एविएशन सेक्टर में बड़ा बदलाव: ATF की कीमतों में अचानक कमी

एविएशन सेक्टर में हाल ही में तेल विपणन कंपनियों ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में अचानक बदलाव किया है। पहले 100% से अधिक की वृद्धि के बाद, सरकार के हस्तक्षेप से कीमतें घटकर लगभग 1.04 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई हैं। इस निर्णय से एयरलाइंस और यात्रियों को राहत मिली है, जिससे हवाई यात्रा महंगी होने की संभावना कम हो गई है। जानें नए रेट्स और सरकार की भूमिका के बारे में इस लेख में।
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एविएशन सेक्टर में बड़ा बदलाव: ATF की कीमतों में अचानक कमी

एविएशन में नया मोड़


नई दिल्ली: एविएशन उद्योग में हाल ही में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। तेल विपणन कंपनियों ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में किए गए अचानक निर्णय को कुछ घंटों के भीतर ही पलट दिया। पहले, कीमतों में 100% से अधिक की वृद्धि की गई थी, लेकिन सरकार के हस्तक्षेप के बाद इसे काफी हद तक घटा दिया गया है।


महंगाई से मिली राहत

इस निर्णय के परिणामस्वरूप एयरलाइंस और यात्रियों दोनों को राहत मिली है। यदि कीमतों में भारी वृद्धि बनी रहती, तो हवाई यात्रा महंगी हो जाती, लेकिन अब सीमित वृद्धि के कारण किराए पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना कम हो गई है।


कीमतों में बदलाव का इतिहास

तेल कंपनियों ने पहले ATF की कीमत को 96,000 रुपये प्रति किलोलीटर से बढ़ाकर लगभग 2.7 लाख रुपये प्रति किलोलीटर कर दिया था। हालांकि, सरकार के हस्तक्षेप के बाद इसे घटाकर लगभग 1.04 लाख रुपये प्रति किलोलीटर कर दिया गया है।


अब कुल मिलाकर कीमतों में बढ़ोतरी महज 8,000 रुपये के आसपास ही सीमित रखी गई है।


सरकार की भूमिका

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण 1 अप्रैल को ATF की कीमतों में 100% से अधिक वृद्धि की संभावना थी।


घरेलू हवाई यात्रा को महंगा होने से बचाने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय के परामर्श से केवल आंशिक और चरणबद्ध बढ़ोतरी लागू की गई है, जिसमें घरेलू एयरलाइंस पर सिर्फ ₹15 प्रति लीटर का अतिरिक्त बोझ डाला गया है।


नए रेट्स की जानकारी

नई दरों के अनुसार, दिल्ली में ATF की कीमत 1,04,927 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है।
कोलकाता में यह 1,09,450 रुपये, चेन्नई में 1,09,873 रुपये और मुंबई में 98,247 रुपये प्रति किलोलीटर तय की गई है।


घरेलू एयरलाइंस को राहत

घरेलू एयरलाइंस के लिए कीमतों में बढ़ोतरी को सीमित रखते हुए लगभग 8.5% तक ही रखा गया है। इससे एयरलाइंस पर अधिक वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा और यात्रियों को भी राहत मिलेगी।


हालांकि, अन्य ऑपरेटर्स जैसे नॉन-शेड्यूल्ड, एडहॉक और चार्टर सेवाओं के लिए कीमतों में भारी उछाल देखा गया है, जहां दरें 1,10,703.08 रुपये प्रति किलोलीटर से बढ़कर 2,07,341.22 रुपये प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई हैं।


अंतरराष्ट्रीय प्रभाव

जेट फ्यूल की कीमतें पहले ही नियंत्रण मुक्त की जा चुकी हैं और ये अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार निर्धारित होती हैं। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि हुई है, जिसका असर ATF पर भी पड़ा है।


इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार, इस स्थिति में सरकार और तेल कंपनियों ने एक "कैलिब्रेटेड अप्रोच" अपनाते हुए संतुलन बनाने की कोशिश की है, ताकि घरेलू एयरलाइंस और यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।