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कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर

ईरान से जुड़े संघर्षों के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अस्थायी कीमत बताया है। हालांकि, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है, क्योंकि सरकारी तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों के प्रभाव को झेलने में सक्षम हैं। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और भारत की ऊर्जा भंडार स्थिति के बारे में।
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कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर

तेल की कीमतों में वृद्धि का कारण

नई दिल्ली - ईरान से जुड़े संघर्षों के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति में रुकावट आने के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई हैं।


राष्ट्रपति का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वृद्धि का बचाव करते हुए कहा कि यह ईरान के परमाणु खतरे का सामना करने की अस्थायी कीमत है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करने के बाद तेल की कीमतें जल्द ही कम हो जाएंगी, और यह वैश्विक सुरक्षा के लिए एक छोटी सी कीमत है।


कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, क्योंकि मध्य पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादकों ने उत्पादन में कमी की है और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति लगभग ठप हो गई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड की कीमत 20.75 प्रतिशत बढ़कर 109.75 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत भी 18 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 109.48 डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह वृद्धि 1980 के दशक के बाद से तेल वायदा कारोबार में सबसे बड़े साप्ताहिक उछालों में से एक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उछाल इसलिए आया है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रह सकती है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।


भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें

भारत में महंगा नहीं होगा पेट्रोल-डीजल
भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की संभावना कम है। सूत्रों के अनुसार, सरकार को उम्मीद है कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में बढ़ोतरी का प्रभाव झेल लेंगी और कीमतें स्थिर रहेंगी। इसके चलते तेल कंपनियों को कुछ समय के लिए कम मुनाफे पर काम करना पड़ सकता है। इस बीच, वैश्विक बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का भाव लगभग 27 प्रतिशत बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।


भारत की ऊर्जा भंडार स्थिति

तेल की कीमतों में यह तेज उछाल मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्षों और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण आया है। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम स्थिर बने हुए हैं। आमतौर पर भारत में ईंधन की कीमतें वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के अनुसार बदलती हैं, लेकिन जब बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव होता है, तो सरकार कभी-कभी तेल कंपनियों से कीमतों का बोझ खुद उठाने को कहती है।


सरकारी सूत्रों का बयान

सरकारी सूत्रों ने शनिवार को भी कहा था कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। उन्होंने बताया कि भारत के ऊर्जा भंडार की स्थिति पहले से बेहतर हो रही है और हालात धीरे-धीरे स्थिर हो रहे हैं। ऊर्जा भंडार में सुधार से सरकार को ईंधन आपूर्ति को संभालने में अधिक भरोसा मिला है। इसके साथ ही, भारत ने कच्चे तेल के आयात को विविध बनाने के लिए कदम उठाए हैं, ताकि संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो सके। सूत्रों के अनुसार, पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के स्रोतों से आता था, लेकिन अब यह हिस्सा बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो गया है।