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कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने कच्चे तेल की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि की है। मार्च में 59% की बढ़ोतरी के साथ, यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। कच्चे तेल की कीमतों में मामूली वृद्धि भी भारत के आयात बिल को अरबों रुपये बढ़ा सकती है। जानें इस स्थिति का भारतीय शेयर बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
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कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव

कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का कारण

नई दिल्ली। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है। मार्च में तेल की कीमतों में लगभग 59 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद की सबसे बड़ी मासिक वृद्धि है। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए यह वृद्धि एक गंभीर चिंता का विषय है। कच्चे तेल की कीमत में केवल 1 डॉलर की वृद्धि भी भारत की पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।


कीमतों में वृद्धि के प्रमुख कारण

यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा इजरायल पर किए गए हालिया मिसाइल हमलों ने युद्ध के दायरे को बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट का खतरा बढ़ गया है। ईरान द्वारा कुवैत के बिजली और जल संयंत्रों पर हमलों और खार्ग द्वीप पर अमेरिकी नियंत्रण की धमकियों ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी है। ईरान की चेतावनी कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद कर सकता है, जिससे दुनिया की 20% तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। अमेरिका द्वारा क्षेत्र में अतिरिक्त बलों की तैनाती और जमीनी कार्रवाई की संभावनाओं ने कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को कम कर दिया है।


भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण भारतीय शेयर बाजार में 1,000 अंकों से अधिक की गिरावट आई है। कच्चे तेल की महंगाई से पेट्रोल, डीजल और माल ढुलाई की लागत में वृद्धि होगी, जिससे मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी की आशंका है। जापान का निक्केई 4.5 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4 प्रतिशत तक गिर गया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।


भारत का आयात बिल

कच्चे तेल की कीमत में महज 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होती है, तो भारत का आयात बिल अरबों रुपये बढ़ जाता है।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली मामूली हलचल भी सीधे हमारे देश के बजट, महंगाई और आम आदमी की जेब पर असर डालती है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, जब कच्चे तेल की कीमत में महज 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होती है, तो भारत का आयात बिल अरबों रुपये बढ़ जाता है। इसका असर न केवल सरकारी खजाने पर पड़ता है, बल्कि यह देश के चालू खाता घाटे को भी चौड़ा कर देता है।