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कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, वायदा बाजार में 11% की कमी

कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जिससे यह 8,588 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते के संकेतों के चलते यह गिरावट आई है। जानें वायदा बाजार में और क्या हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों पर इसका क्या असर पड़ा है।
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कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, वायदा बाजार में 11% की कमी

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

बुधवार को वायदा कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में 11 प्रतिशत से अधिक की कमी आई, जिससे यह 8,588 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते के संकेतों के चलते वैश्विक तेल मानकों में गिरावट आई है।


मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर मई में डिलीवरी वाले कच्चे तेल के अनुबंध की कीमत 1,110 रुपये यानी 11.45 प्रतिशत घटकर 8,588 रुपये प्रति बैरल हो गई, जिसमें 12,132 लॉट का कारोबार हुआ।


इसी प्रकार, जून अनुबंध की कीमत भी 1,098 रुपये यानी 11.69 प्रतिशत की कमी के साथ 8,298 रुपये प्रति बैरल पर आ गई, जिसमें 4,274 लॉट का लेन-देन हुआ।


विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने और व्यापक परमाणु वार्ता के लिए प्रारंभिक समझौते के करीब पहुंचने की खबरों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट आई है।


अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई।


ब्रेंट तेल के जुलाई अनुबंध की कीमत 11.57 डॉलर या 10.53 प्रतिशत घटकर 98.30 डॉलर प्रति बैरल हो गई। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) की कीमत 12.39 डॉलर यानी 12.11 प्रतिशत की कमी के साथ 89.88 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।


यह ध्यान देने योग्य है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए चलाए जा रहे 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को निलंबित कर दिया है और ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते की दिशा में बातचीत में प्रगति होने का दावा किया है।