कर्मचारी संगठनों की महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में शामिल करने की मांग: क्या है इसके पीछे का कारण?
महंगाई भत्ते का मुद्दा
नई दिल्ली: कर्मचारी संघों ने महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक सैलरी में समाहित करने की मांग की है। उनके अनुसार, यह आवश्यक है क्योंकि कई भत्ते, जैसे हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस, पेंशन और इंक्रीमेंट, बेसिक सैलरी से जुड़े होते हैं। केंद्र सरकार के कर्मचारी आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिसके लिए विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकें चल रही हैं।
महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में शामिल करने का अर्थ
महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में शामिल करने की मांग का तात्पर्य है कि कर्मचारी संघों का मानना है कि मौजूदा DA को अब बेसिक सैलरी का हिस्सा बनाना चाहिए। इससे सैलरी संरचना में वृद्धि होगी। कर्मचारियों का तर्क है कि महंगाई पिछले कई वर्षों से बढ़ रही है और DA इतना बढ़ गया है कि इसे अलग से नहीं रखा जाना चाहिए।
इस मांग के पीछे का कारण
इस मांग का मुख्य कारण रहने-सहने के खर्च में वृद्धि है। ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन ने 8वें वेतन आयोग को एक मेमोरेंडम प्रस्तुत किया है, जिसमें बताया गया है कि 31 दिसंबर, 2025 तक DA लगभग 58% तक पहुंच सकता है। फेडरेशन का कहना है कि यह वृद्धि घरेलू खर्चों और महंगाई में बढ़ोतरी को दर्शाती है।
फैमिली यूनिट के संबंध में मांग
फेडरेशन का कहना है कि 7वें वेतन आयोग के तहत मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये तीन सदस्यों वाले फैमिली यूनिट मॉडल पर आधारित है। उन्होंने इस संरचना को बदलकर पांच सदस्यों के यूनिट में परिवर्तित करने और उसी अनुसार न्यूनतम वेतन की पुनर्गणना का प्रस्ताव दिया है।
न्यूनतम वेतन का गणित
कर्मचारी संगठन ने न्यूनतम वेतन में वैज्ञानिक बदलाव की मांग की है। AINPSEF ने 'फैमिली यूनिट मॉडल' को तीन से बढ़ाकर पांच करने का प्रस्ताव दिया है। उनके अनुसार, 6,000 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये होना चाहिए। यदि इसमें 58% DA जोड़ा जाए, तो यह लगभग 47,400 रुपये हो जाता है। पोषण और उपभोग खर्च को ध्यान में रखते हुए, संगठन का तर्क है कि न्यूनतम वेतन 55,000 से 60,000 रुपये के बीच होना चाहिए।
