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किट-कैट: एक चॉकलेट का सफर जो बन गया ब्रेक का प्रतीक

किट-कैट की कहानी एक साधारण चॉकलेट से शुरू होकर एक वैश्विक ब्रांड बनने तक का सफर है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसकी शुरुआत हुई, जब सैनिकों को घर से आने वाले पार्सल में यह चॉकलेट मिलती थी। समय के साथ, किट-कैट ने अपने अनोखे विज्ञापनों और मार्केटिंग रणनीतियों के जरिए खुद को ब्रेक का प्रतीक बना लिया। जानें कैसे नेस्ले ने इसे एक ग्लोबल ब्रांड में बदल दिया और भारत में इसकी सफलता की कहानी।
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किट-कैट: एक चॉकलेट का सफर जो बन गया ब्रेक का प्रतीक

किट-कैट का ऐतिहासिक सफर

जब ब्रिटेन द्वितीय विश्व युद्ध में था, तब वहां की जनता खाने के लिए तरस रही थी। सैनिक भी मोर्चे पर भूखे-प्यासे लड़ाई कर रहे थे। इस कठिन समय में, सैनिकों को घर से आने वाले पार्सल का इंतजार रहता था। पार्सल में चिट्ठियों के साथ एक नीले रैपर में लिपटी शुगर-फ्री चॉकलेट होती थी, जो खासतौर पर सैनिकों के लिए बनाई गई थी। यह चॉकलेट, जिसे आज हम किट-कैट के नाम से जानते हैं, तब भी बेहद लोकप्रिय थी। हाल ही में, इसी चॉकलेट से भरा एक ट्रक चोरी हो गया है।


किट-कैट नाम की शुरुआत लंदन के एक प्रसिद्ध क्लब से हुई, जहां बड़े नेता, लेखक और कलाकार इकट्ठा होते थे। इस क्लब में परोसे जाने वाले मटन पाई के नाम पर किट-कैट नाम रखा गया। हेनरी आइज़ैक राउनट्री, जो राउनट्री कंपनी के मालिक थे, ने इस नाम को अपनाया। उनकी कंपनी फल की कैंडीज़ के लिए जानी जाती थी। 1911 में, राउनट्री ने किट-कैट नाम का ट्रेडमार्क रजिस्टर कराया।


1920 में, कंपनी ने किट-कैट नाम से चॉकलेट बेचना शुरू किया, लेकिन यह सफल नहीं हुआ। एक कर्मचारी ने सुझाव दिया कि ऐसा स्नैक होना चाहिए जिसे लोग आसानी से अपने साथ ले जा सकें। इस सुझाव ने किट-कैट के विकास की दिशा बदल दी।


किटकैट कैसे बना ब्रेक का प्रतीक?

इस सुझाव के आधार पर, 1935 में Rowntree's चॉकलेट बार लॉन्च किया गया। इसे पहले लंदन और दक्षिण इंग्लैंड में बेचा गया। हालांकि, 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के कारण सामग्री की कमी हुई। इस वजह से चॉकलेट का स्वाद बदलकर डार्क चॉकलेट कर दिया गया। युद्ध समाप्त होने के बाद, किट-कैट फिर से दूध वाली चॉकलेट के रूप में लौट आया और ब्रिटेन में लोकप्रिय हो गया।


किट-कैट को एक स्लोगन की आवश्यकता थी, जिससे यह लोगों से जुड़ सके। 1957 में, एक विज्ञापन में एक बच्चा दिखाया गया जो खिलौने को जोड़ने की कोशिश कर रहा था, लेकिन असफल हो रहा था। वह किट-कैट खाकर ब्रेक लेता है। इस विज्ञापन ने किट-कैट को ब्रेक लेने का प्रतीक बना दिया।


नेस्ले ने किट-कैट को बनाया ग्लोबल ब्रांड

1988 में, स्विट्ज़रलैंड की कंपनी नेस्ले ने राउनट्री को खरीद लिया। इस डील के बाद, किट-कैट एक स्थानीय ब्रांड से वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हो गया। नेस्ले ने विभिन्न देशों में किट-कैट के स्वाद को स्थानीय पसंद के अनुसार ढाला। जापान में, किट-कैट के 400 से अधिक फ्लेवर्स उपलब्ध हैं।


हालांकि, अमेरिका में किट-कैट का लाइसेंस द हर्शी कंपनी के पास था। इस वजह से, अमेरिका में किट-कैट हर्शी द्वारा बनाया जाता है जबकि बाकी दुनिया में नेस्ले इसका उत्पादन करता है।


किट-कैट की मार्केटिंग और प्रतिस्पर्धा

2004 में, चॉकलेट उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई। केडबरी ने अपने डेरी मिल्क ब्रांड को मजबूत किया। नेस्ले ने किट-कैट को बचाने के लिए नए वर्जन पेश किए, लेकिन मार्केट ग्रोथ रुक गई। 2004 में, किट-कैट ने अपना प्रसिद्ध स्लोगन बदल दिया, जिसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा।


नेस्ले की मार्केटिंग हेड ने रिसर्च की और पाया कि लोग किट-कैट को ब्रेक के समय खाते हैं। इसके बाद 'A break’s best friend' कैंपेन शुरू किया गया, जिससे बिक्री में वृद्धि हुई।


भारत में किट-कैट की सफलता

किट-कैट ने 1995 में भारत में प्रवेश किया। उस समय, कैडबरी पहले से ही मजबूत था। किट-कैट ने छोटे पैक लॉन्च किए, जिससे यह आम लोगों की पहुंच में आ गया। इसके अनोखे विज्ञापनों ने भी इसे लोकप्रिय बनाया।


हाल ही में, 12 टन किट-कैट चॉकलेट चोरी हो गई। नेस्ले ने इस घटना को मजाकिया अंदाज में पेश किया, जिससे ब्रांड की पब्लिसिटी बढ़ी।