केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि, रिफंड में कमी
नई दिल्ली में प्रत्यक्ष कर संग्रह की स्थिति
नई दिल्ली: आयकर विभाग ने बुधवार को जारी आंकड़ों में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल 2025 से 17 मार्च 2026) के दौरान रिफंड के बाद केंद्र सरकार का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 22.80 लाख करोड़ रुपये रहा है। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 7.2 प्रतिशत अधिक है। सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 27.14 लाख करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 4.86 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस दौरान रिफंड की राशि में कमी आई है।
कॉरपोरेट टैक्स का संग्रह
वर्तमान वित्त वर्ष में 17 मार्च तक कॉरपोरेट टैक्स का शुद्ध संग्रह 10.91 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 12.75 प्रतिशत अधिक है। अधिकारियों का कहना है कि कॉरपोरेट टैक्स में यह वृद्धि आर्थिक गतिविधियों में तेजी और कंपनियों के बेहतर मुनाफे का संकेत है, जिससे सरकार के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।
व्यक्तिगत आयकर संग्रह की स्थिति
गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह (जिसमें व्यक्तिगत आयकर शामिल है) 11.32 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में केवल 2.7 प्रतिशत अधिक है। डेलॉयट इंडिया के पार्टनर रोहिंटन सिधवा के अनुसार, पिछले साल व्यक्तिगत करदाताओं को दी गई दरों में कटौती का असर अभी भी इस मद के संग्रह पर देखा जा रहा है।
रिफंड में कमी के कारण
इस वर्ष 1 अप्रैल से 17 मार्च के बीच कुल 4.34 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि (4.61 लाख करोड़ रुपये) की तुलना में 5.86 प्रतिशत कम है। कर अधिकारियों का कहना है कि यह कमी संरचनात्मक और प्रक्रियागत कारकों से जुड़ी हुई है। रिटर्न दाखिल करने के तरीके में बदलाव और सिस्टम आधारित जांच ने फर्जी रिफंड के दावों पर अंकुश लगाया है।
एसटीटी संग्रह में वृद्धि
शेयर बाजार में लेन-देन पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) के संग्रह में भी वृद्धि हुई है। चालू वित्त वर्ष में 17 मार्च तक एसटीटी संग्रह 55,717 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 53,095 करोड़ रुपये की तुलना में 4.9 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार में बढ़ती सहभागिता के कारण यह आंकड़ा बेहतर हुआ है।
