केंद्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में 100% FDI को दी मंजूरी
बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश का नया अध्याय
केंद्र सरकार ने शनिवार को बीमा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को स्वचालित मार्ग से स्वीकृति प्रदान की है। यह कदम देश में बीमा की पहुंच को बढ़ाने, प्रीमियम को कम करने और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के लिए यह सीमा 20 प्रतिशत पर ही बनी रहेगी। यह संशोधन विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) नियम, 2026 में किया गया है।
LIC के लिए 20% की सीमा बरकरार
नए नियमों के अनुसार, LIC में विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत रहेगी। यह निवेश जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 और बीमा अधिनियम, 1938 के प्रावधानों के अंतर्गत मान्य होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पहले कहा था कि LIC एक सार्वजनिक क्षेत्र की संस्था है, इसलिए इसकी सुरक्षा आवश्यक है। इसके अलावा, पोर्टफोलियो निवेशक अब बीमा कंपनियों में निवेश कर सकेंगे, लेकिन इसके लिए IRDAI की मंजूरी और सत्यापन आवश्यक होगा।
भूमि सीमा वाले देशों पर सख्त नियम लागू
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने एक प्रेस नोट जारी कर बताया कि चीन, हांगकांग, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे भूमि सीमा वाले देशों पर सख्त नियम लागू रहेंगे। पहले इन देशों के किसी भी शेयर के लिए अनिवार्य मंजूरी लेनी पड़ती थी, लेकिन अब यह पाबंदी केवल लाभकारी स्वामियों (बेनेफिशियल ओनर्स) पर लागू होगी। इसका मतलब है कि यदि किसी फर्म में इन देशों के नागरिकों का लाभकारी स्वामित्व है, तो उन्हें मंजूरी लेनी होगी।
आम लोगों को मिलने वाले लाभ
पिछले दिसंबर में संसद ने 74% से बढ़ाकर 100% FDI का विधेयक पारित किया था, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून का रूप दिया गया। वित्त मंत्री ने कहा था कि इससे विदेशी कंपनियों को स्थानीय साझेदार न मिलने पर भी भारत में अकेले आने का अवसर मिलेगा। अधिक कंपनियों के आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, प्रीमियम में कमी आएगी और बीमा की पहुंच बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ आम जनता को होगा और वे बीमा कराने के लिए प्रेरित होंगे।
