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केंद्रीय बजट: करदाताओं की उम्मीदें और सुधार की आवश्यकता

जैसे-जैसे केंद्रीय बजट का समय नजदीक आता है, करदाताओं की नजरें वित्त मंत्री पर टिकी हैं। इस बार भी अपेक्षाएं लंबी हैं, जिसमें कर प्रणाली को सरल बनाने की मांग प्रमुख है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि एक साझा आयकर रिटर्न फॉर्म और मास्टर सर्कुलर की आवश्यकता है। इसके अलावा, टीडीएस व्यवस्था में सुधार और प्रदूषण नियंत्रण के लिए कर नीति का उपयोग करने की बात भी उठाई गई है। क्या बजट में ये सुधार शामिल होंगे? जानें इस लेख में।
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केंद्रीय बजट: करदाताओं की उम्मीदें और सुधार की आवश्यकता

बजट की तैयारी में करदाताओं की नजरें वित्त मंत्री पर

नई दिल्ली: जैसे-जैसे केंद्रीय बजट का समय नजदीक आता है, देश के करदाताओं की निगाहें वित्त मंत्री पर टिकी रहती हैं। हर साल की तरह इस बार भी अपेक्षाओं की एक लंबी सूची है। सरकार ने कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने का वादा किया है, जिससे करदाताओं को उम्मीद है कि बजट में ऐसे कदम उठाए जाएंगे जो अनुपालन को आसान बनाएं और मौजूदा जटिलताओं को कम करें। नई आयकर व्यवस्था और बदलते आर्थिक परिदृश्य इस चर्चा को और भी महत्वपूर्ण बनाते हैं।


एक राष्ट्र-एक आयकर रिटर्न की आवश्यकता

वर्तमान में, देश में विभिन्न करदाताओं के लिए सात प्रकार के आयकर रिटर्न फॉर्म उपलब्ध हैं। आय के स्रोत बदलने पर फॉर्म भी बदलता है, जिससे भ्रम और गलतियों की संभावना बढ़ जाती है। कर विशेषज्ञों का मानना है कि एक साझा आयकर रिटर्न फॉर्म लागू किया जाना चाहिए, जिसमें करदाता अपनी श्रेणी और आय के स्रोत का चयन कर सकें, जिससे केवल आवश्यक जानकारी ही सामने आए। इससे रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को काफी सरल बनाया जा सकता है।


नए आयकर कानून के लिए मास्टर सर्कुलर की आवश्यकता

नया आयकर कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला है। पिछले छह दशकों में मौजूदा कानून के तहत सैकड़ों सर्कुलर और नोटिफिकेशन जारी किए गए हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि एक मास्टर सर्कुलर जारी किया जाना चाहिए, जिसमें केवल वही निर्देश शामिल हों जो नए कानून के तहत प्रासंगिक हों। इससे करदाताओं और पेशेवरों को सही नियमों का संदर्भ खोजने में आसानी होगी और अनावश्यक भ्रम भी कम होगा।


टीडीएस व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता

टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (टीडीएस) अनुपालन करदाताओं के लिए एक समय लेने वाली प्रक्रिया मानी जाती है। कई धाराओं में संग्रहण नगण्य है, फिर भी अनुपालन का बोझ बना रहता है। सुझाव दिया गया है कि ऐसी धाराओं को समाप्त किया जाए या आपस में जोड़ा जाए। इसके साथ ही सीमित टीडीएस दरें निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि पालन करना आसान हो। टीडीएस सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को हटाकर फॉर्म 26AS और AIS को अंतिम आधार माना जा सकता है।


प्रदूषण से निपटने में कर नीति की भूमिका

देश के कई शहर लगातार दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। इसे ध्यान में रखते हुए प्रत्यक्ष कर कानून को एक प्रोत्साहन उपकरण के रूप में उपयोग करने का सुझाव दिया जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर नए कर ढांचे में विशेष छूट दी जा सकती है। इसके अलावा, कंपनियों को अपने सीएसआर खर्च का एक हिस्सा प्रदूषण नियंत्रण और अनुसंधान में लगाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है, जिसे कर कटौती योग्य माना जाएगा।


सरलीकरण और करदाताओं की अपेक्षाएं

सरकार की नीति कम कर दरों और कम छूट की रही है, लेकिन मौजूदा स्वास्थ्य और पर्यावरण संकट को देखते हुए कुछ अपवादों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। करदाताओं को उम्मीद है कि सरकार उनके व्यावहारिक अनुभवों को ध्यान में रखेगी। यदि बजट में इन सुझावों को शामिल किया जाता है, तो कर प्रणाली न केवल सरल होगी, बल्कि सामाजिक चुनौतियों का सामना करने में भी सहायक साबित हो सकती है।