केदारा कैपिटल की टाइनर ऑर्थोटिक्स में हिस्सेदारी खरीदने की योजना
हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश की हलचल
मोहाली स्थित टाइनर ऑर्थोटिक्स, जो ऑर्थोटिक्स और फ्रैक्चर सपोर्ट उत्पादों का निर्माण करती है, में बहुमत हिस्सेदारी खरीदने की दौड़ में केदारा कैपिटल सबसे आगे है। इस संभावित सौदे का कुल मूल्यांकन लगभग 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये के बीच होने की उम्मीद है।
सौदे की जानकारी
सूत्रों के अनुसार, मौजूदा निवेशक लाइटहाउस फंड्स और कंपनी के प्रमोटर्स मिलकर लगभग 60 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं। यह लेनदेन मुख्य रूप से सेकेंडरी डील के रूप में होगा, जिसमें नई पूंजी के बजाय मौजूदा शेयरों की बिक्री पर जोर दिया जाएगा।
हेल्थकेयर कंपनियों की बढ़ती मांग
उपभोक्ता-उन्मुख और तेजी से विकसित हो रही हेल्थकेयर कंपनियां वर्तमान में निवेशकों के ध्यान का केंद्र बनी हुई हैं। स्वास्थ्य बीमा कवरेज में वृद्धि, इलाज की बेहतर पहुंच और भारत में मेडिकल डिवाइस क्षेत्र का विस्तार इसके प्रमुख कारण हैं।
केदारा कैपिटल की बातचीत
अगस्त में, केदारा कैपिटल ने इस डील पर बातचीत फिर से शुरू की और ओ3 कैपिटल को सलाहकार के रूप में नियुक्त किया। पहले, 2024 में सिंगापुर की टेमासेक के साथ अल्पांश हिस्सेदारी पर चर्चा हुई थी, लेकिन वह आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि, टाइनर के संस्थापक, लाइटहाउस फंड्स, केदारा कैपिटल और ओ3 कैपिटल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
टाइनर का इतिहास और विकास
टाइनर की स्थापना 1993 में हुई थी और इसे वर्तमान में सिंह परिवार की दूसरी पीढ़ी द्वारा संचालित किया जा रहा है। कंपनी के पास 150 से अधिक उत्पादों का पोर्टफोलियो है, जिसमें बॉडी ब्रेसेस, फ्रैक्चर और वॉकिंग एड्स, ट्रैक्शन किट, एडवांस्ड नी-ब्रेसेस, फिंगर स्प्लिंट्स, सिलिकॉन और फुट केयर उत्पाद शामिल हैं।
वित्तीय प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2024 में, टाइनर का राजस्व 495.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 394.1 करोड़ रुपये था। इसी तरह, कंपनी का मुनाफा भी वित्त वर्ष 2023 के 50.9 करोड़ रुपये से बढ़कर 73.4 करोड़ रुपये हो गया है।
भारत का मेडिकल डिवाइस बाजार
भारत का मेडिकल डिवाइस सेक्टर हाल के वर्षों में प्राइवेट इक्विटी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बीमा कवरेज में वृद्धि, आय स्तर में सुधार और टियर-2 व टियर-3 शहरों में स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार इस क्षेत्र को नई गति दे रहा है।
भविष्य की संभावनाएं
अनुमानों के अनुसार, भारत का मेडिकल डिवाइस बाजार अगले पांच वर्षों में लगभग 16.4 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़कर 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वित्त वर्ष 2024 में 12 अरब डॉलर के स्तर पर रहने वाला मेड-टेक उद्योग मेडिकल टूरिज्म और बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता से भी लाभान्वित हो रहा है। ऐसे में टाइनर जैसी घरेलू कंपनियों में निवेश की रुचि बढ़ने की संभावना है।
