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कोल इंडिया के ओएफएस में निवेशकों की भारी भागीदारी, 19 हजार करोड़ रुपये की बोलियां मिलीं

कोल इंडिया के ओएफएस में बुधवार को निवेशकों ने 19 हजार करोड़ रुपये की बोलियां लगाई, जिससे बाजार में हलचल मच गई। सरकार 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है, जिसमें 12.32 करोड़ शेयर शामिल हैं। संस्थागत निवेशकों ने 45 करोड़ से अधिक शेयरों के लिए आवेदन किया है, जो आरक्षित हिस्से से आठ गुना अधिक है। इस प्रक्रिया में ग्रीन शू विकल्प का उपयोग भी संभव है, जिससे सरकार अतिरिक्त राशि जुटा सकती है। जानें इस ओएफएस के पीछे की रणनीतियों और बाजार की प्रतिक्रिया के बारे में।
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कोल इंडिया के ओएफएस में निवेशकों की भारी भागीदारी, 19 हजार करोड़ रुपये की बोलियां मिलीं

कोल इंडिया के ओएफएस में हलचल

बुधवार को कोल इंडिया के ओएफएस के चलते बाजार में काफी गतिविधि देखी गई। जैसे ही सरकार ने कंपनी में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू की, संस्थागत निवेशकों ने बड़ी संख्या में बोलियां लगाई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पहले दिन लगभग 19 हजार करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं, जिसने बाजार के विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया।


सरकार की हिस्सेदारी बिक्री

सरकार कोल इंडिया में अपनी 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत 12.32 करोड़ से अधिक शेयर बाजार में जारी किए गए हैं। शेयरों का न्यूनतम मूल्य 412 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, इस इश्यू में 1 प्रतिशत का ग्रीन शू विकल्प भी शामिल है, जिसे मांग बढ़ने पर लागू किया जा सकता है।


संस्थागत निवेशकों की भागीदारी

एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, गैर-खुदरा यानी संस्थागत निवेशकों ने 45 करोड़ से अधिक शेयरों के लिए आवेदन किया है। यह उनके लिए आरक्षित हिस्से से आठ गुना अधिक है। खास बात यह है कि निवेशकों ने 436.69 रुपये प्रति शेयर के संकेतात्मक मूल्य पर बोलियां लगाईं, जो न्यूनतम मूल्य से काफी अधिक है।


सरकार के ग्रीन शू विकल्प का उपयोग

इतनी मजबूत मांग के चलते यह संभावना बढ़ गई है कि सरकार ग्रीन शू विकल्प का उपयोग कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो सरकार अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचकर और अधिक राशि जुटा सकती है।


कोल इंडिया के शेयरों में वृद्धि

कोल इंडिया के शेयरों में भी बाजार में तेजी आई है। बुधवार को कंपनी का शेयर बीएसई पर 1.01 प्रतिशत बढ़कर 462.90 रुपये पर बंद हुआ। इससे पहले मंगलवार को शेयर 458.25 रुपये पर बंद हुआ था। न्यूनतम मूल्य को मंगलवार के बंद भाव से लगभग 10 प्रतिशत कम रखा गया था ताकि निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।


सरकार का विनिवेश लक्ष्य

यह सरकार का चालू वित्त वर्ष में दूसरा बड़ा ओएफएस है। इससे पहले, केंद्र सरकार ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8.08 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 2266 करोड़ रुपये जुटाए थे। वर्तमान में, सरकार विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण के माध्यम से राजस्व बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।


विनिवेश से राजस्व लक्ष्य

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में, सरकार ने विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण से 80 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। यह पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान 33,837 करोड़ रुपये से काफी अधिक है।