क्या अमेरिका की टैरिफ नीति से 600 अरब डॉलर का लाभ होगा? ट्रंप का बड़ा दावा
ट्रंप के बयान से फिर हलचल
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों के कारण चर्चा में हैं। 2025 में सुर्खियों में रहने के बाद, 2026 की शुरुआत में भी उनके बयान वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर रहे हैं। वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई और वहां के तेल क्षेत्र को लेकर दावों के बाद, ट्रंप ने अमेरिका की टैरिफ नीति पर एक बड़ा दावा किया है।
टैरिफ से 600 अरब डॉलर का दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि टैरिफ से अमेरिका को भारी आर्थिक लाभ हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि इस नीति के माध्यम से अमेरिका को 600 अरब डॉलर से अधिक का राजस्व मिलने की संभावना है, जिससे देश न केवल आर्थिक रूप से बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में भी मजबूत होगा।
सोशल मीडिया पर ट्रंप का बयान
सोमवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि टैरिफ से होने वाली कुल वसूली 600 अरब डॉलर (लगभग 54.12 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है। यह दावा ऐसे समय में आया है जब टैरिफ व्यवस्था को लेकर कानूनी चुनौतियां सामने आ रही हैं और मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
ट्रंप का तर्क
अपनी पोस्ट में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि टैरिफ से मिलने वाली यह राशि अमेरिका को वित्तीय और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों मोर्चों पर मजबूती प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि इन शुल्कों के कारण अमेरिका की स्थिति पहले से कहीं अधिक सशक्त हुई है।
मीडिया अनुमानों पर ट्रंप की प्रतिक्रिया
हाल के दिनों में कई रिपोर्ट्स में US Tariff Revenue का अनुमान 200 से 220 अरब डॉलर के बीच लगाया गया है। इन अनुमानों को खारिज करते हुए ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि "रेवेन्यू कलेक्शन को तथाकथित मीडिया द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ से जुड़े फैसले को प्रभावित करने के लिए आंकड़ों को जानबूझकर कम करके दिखाया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ का मामला
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ व्यवस्था की जांच इसलिए की जा रही है क्योंकि इस पर सवाल उठे हैं कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है। इस मामले की आखिरी सुनवाई नवंबर 2025 में हुई थी, जिसके बाद अंतिम फैसला 2026 तक के लिए टाल दिया गया। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि फैसला कब सुनाया जाएगा।
टैरिफ नीति की शुरुआत
डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 से भारत, चीन, ब्राजील समेत कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ यानी पारस्परिक शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इस नीति का उद्देश्य अमेरिकी उत्पादों पर अन्य देशों द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ के जवाब में समान स्तर का टैक्स लगाना था। ट्रंप ने इस दिन को 'लिबरेशन-डे' करार दिया था। इसके बाद कुछ देशों पर टैरिफ घटाए गए, जबकि कुछ पर शुल्क बढ़ा दिया गया।
