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क्या केंद्र सरकार कॉम्पेनसेशन सेस को समाप्त करने की योजना बना रही है?

केंद्र सरकार कॉम्पेनसेशन सेस को समाप्त करने पर विचार कर रही है, जो कोविड-19 के दौरान लिए गए 2.69 लाख करोड़ के कर्ज को चुकाने के लिए लागू किया गया था। जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा। यदि सेस समाप्त होता है, तो जीएसटी के स्लैब में भी बदलाव संभव है, जिससे कई सामानों की कीमतों में कमी आ सकती है। जानें इस विषय पर और क्या जानकारी है और इससे आपके लिए क्या लाभ हो सकता है।
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क्या केंद्र सरकार कॉम्पेनसेशन सेस को समाप्त करने की योजना बना रही है?

कोविड-19 के दौरान लिया गया कर्ज


कोविड-19 के दौरान केंद्र सरकार ने लिया था 2.69 लाख करोड़ का कर्ज, जिसे चुकाने के लिए शुरू किया था कॉम्पेनसेशन सेस


बिजनेस डेस्क : अमेरिकी टैरिफ के प्रभावों से निपटने और अर्थव्यवस्था की विकास दर को बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार कई उपाय कर रही है। इसी क्रम में जीएसटी दरों में बदलाव का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही, यह भी चर्चा में है कि केंद्र सरकार कॉम्पेनसेशन सेस को समाप्त करने पर विचार कर रही है। जीएसटी की आगामी बैठक में इस पर निर्णय लिया जा सकता है।


कर्ज चुकाने की प्रक्रिया

केंद्र सरकार ने कोविड-19 के दौरान राज्यों की सहायता के लिए 2.69 लाख करोड़ का कर्ज लिया था। इस कर्ज को चुकाने के लिए कॉम्पेनसेशन सेस को मार्च 2026 तक बढ़ाया गया था।


मजबूत जीएसटी संग्रह के कारण सरकार इस कर्ज को अक्टूबर 2025 तक चुकाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अगली जीएसटी काउंसिल की बैठक में यह तय किया जाएगा कि सेस को पूरी तरह समाप्त किया जाए या जीएसटी स्लैब में शामिल किया जाए।


जीएसटी के स्लैब में संभावित बदलाव

जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी स्लैब को कम करने का निर्णय लिया जा सकता है। 12% और 28% के स्लैब को समाप्त करने की मंजूरी मिल सकती है। यदि ऐसा होता है, तो केवल 5% और 18% के दो स्लैब रहेंगे, जबकि लग्जरी वस्तुओं पर 40% का टैक्स लगेगा।


वर्तमान में जीएसटी के चार स्लैब हैं: 5%, 12%, 18%, और 28%। 21 अगस्त को हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में मंत्रियों के समूह ने 12% और 28% के स्लैब को समाप्त करने की मंजूरी दी थी।


पीएम मोदी का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर जीएसटी सुधारों की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि इस दिवाली लोगों को बड़ा तोहफा मिलने वाला है। हम अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार लेकर आ रहे हैं, जिससे सामान्य लोगों के लिए टैक्स कम होगा और रोजमर्रा की चीजें सस्ती होंगी।


सामानों की कीमतों में कमी की संभावना

यदि जीएसटी दरों में बदलाव होता है, तो विशेषज्ञों के अनुसार सूखे मेवे, ब्रांडेड नमकीन, टूथपाउडर, साबुन, हेयर ऑयल, सामान्य एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर दवाएं, प्रोसेस्ड फूड, स्नैक्स, फ्रोजन सब्जियां, कंडेंस्ड मिल्क, कुछ मोबाइल, कुछ कंप्यूटर, सिलाई मशीन, प्रेशर कुकर, गीजर जैसी वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं।


इसके अलावा, बिना बिजली वाले पानी के फिल्टर, इलेक्ट्रिक आयरन, वैक्यूम क्लीनर, 1000 रुपए से अधिक के रेडीमेड कपड़े, 500-1000 रुपए की रेंज वाले जूते, अधिकांश वैक्सीन, एचआईवी/टीबी डायग्नोस्टिक किट, साइकिल, बर्तन पर भी कम टैक्स लगेगा।