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क्या केंद्रीय बजट 2026-27 कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा?

कृषि और संबंधित उद्योगों के नेताओं ने केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले सरकार से बड़े निवेश की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट कृषि को विकास का प्रमुख इंजन बनाने में मदद कर सकता है। इसमें डिजिटल अवसंरचना, जल-संरक्षण, और आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया जाएगा। डेयरी क्षेत्र ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जैसे कि चारे पर सब्सिडी और पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता। यदि सरकार इन पहलुओं पर ध्यान देती है, तो कृषि क्षेत्र को एक नई दिशा मिल सकती है।
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क्या केंद्रीय बजट 2026-27 कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा?

कृषि में बड़े निवेश की आवश्यकता


नई दिल्ली : केंद्रीय बजट 2026-27 की तैयारी के तहत, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले बजट से पहले, कृषि और संबंधित उद्योगों के नेताओं ने सरकार से इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण निवेश की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि, जो देश की लगभग आधी जनसंख्या को रोजगार देती है, को अब केवल कल्याणकारी क्षेत्र के रूप में नहीं बल्कि विकास का मुख्य आधार बनाना आवश्यक है। इसके लिए डिजिटल अवसंरचना, जल संरक्षण, और जलवायु-स्मार्ट खेती जैसी पहलों की आवश्यकता होगी।


कृषि को आर्थिक विकास का आधार बनाना

कृषि को विकास का मजबूत इंजन बनाने का समय
विशेषज्ञों के अनुसार, बजट 2026-27 कृषि को केवल 'समाज कल्याण' की श्रेणी से बाहर निकालकर 'आर्थिक विकास' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। ईवाई इंडिया के GPS–Agriculture, Livelihood, Social and Skills लीडर अमित वत्स्यायन का कहना है कि कृषि को अब केवल कल्याणकारी दृष्टिकोण से नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे रोजगार, ग्रामीण मांग, उत्पादकता और आर्थिक स्थिरता के लिए एक विश्वसनीय विकास मॉडल माना जा रहा है। इस दृष्टिकोण से बजट को कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश और आधुनिक तकनीकों को प्राथमिकता देने का अवसर मिल रहा है।


डेयरी क्षेत्र की महत्वपूर्ण मांगें

डेयरी क्षेत्र ने भी रखे महत्वपूर्ण सुझाव
कृषि क्षेत्र से जुड़े डेयरी उद्योग ने भी बजट से कई महत्वपूर्ण कदमों की उम्मीद जताई है। डेयरी क्षेत्र ने गुणवत्ता वाले चारे पर सब्सिडी और क्रोमोसोम-छांटा (chromosome-sorted) वीर्य पर सब्सिडी देने की मांग की है, जिससे पशु उत्पादकता में वृद्धि हो सके। इसके साथ ही, पशु चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए वेटरनरी कॉलेजों की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पशु चिकित्सकों की संख्या को 68,000 से बढ़ाकर 1,10,000-1,20,000 तक लाना आवश्यक है, ताकि ग्रामीण स्तर पर पशुपालन की गुणवत्ता और स्वास्थ्य में सुधार हो सके।


जल-संबंधी निवेश पर जोर

कृषि संपत्ति और जल-सम्बंधी निवेश को प्राथमिकता
अमित वत्स्यायन ने कहा कि माइक्रो-इरीगेशन, वॉटरशेड प्रबंधन, aquifer recharge और नवीकरणीय ऊर्जा आधारित कृषि संसाधनों में निवेश बढ़ाना चाहिए। इन निवेशों से न केवल जल-संवर्धन और जलवायु-लचीली खेती को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। यह कदम लंबे समय में किसानों की आय स्थिर करने और कृषि उत्पादन को स्थायी रूप से बढ़ाने में मदद करेगा।


डिजिटल ढांचे में निवेश की आवश्यकता

डिजिटल ढांचे में बड़ा निवेश: भविष्य की खेती का आधार
Mapmycrop के संस्थापक और CEO स्वप्निल जाधव ने कहा कि मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और आसान क्रेडिट सुविधा का निर्माण कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। प्रिसिजन एग्रीकल्चर यानी सटीक कृषि के व्यापक उपयोग के लिए डिजिटल तकनीक जरूरी है। इसके लिए कृषि ड्रोन, IoT सेंसर और AI आधारित एनालिटिक्स जैसी तकनीकों पर विशेष जोर देना चाहिए। इससे खेती में लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी.


कृषि को नई दिशा देने की उम्मीद

बजट के जरिए कृषि को नई दिशा देने की उम्मीद
कुल मिलाकर कृषि विशेषज्ञों की यह उम्मीद है कि बजट 2026-27 कृषि क्षेत्र को एक आधुनिक, टिकाऊ और अधिक लाभदायक उद्योग बनाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो सकता है। डिजिटल और जल-संबंधी निवेश, आधुनिक प्रौद्योगिकी, और पशुपालन के लिए संरचनात्मक सुधार किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यदि सरकार इन पहलुओं पर गंभीरता से काम करती है, तो कृषि वास्तव में देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत विकास इंजन बन सकता है.