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क्या भारतीय शेयर बाजार में निवेश का सही समय आ गया है? जानें क्यों है ये अवसर खास!

भारतीय शेयर बाजार में हालिया करेक्शन ने निवेशकों के लिए नए अवसर उत्पन्न किए हैं। सितंबर 2024 के उच्चतम स्तर से 20-30 प्रतिशत की गिरावट के बाद, बाजार अब निवेश के लिए अधिक आकर्षक नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों की आय में डबल डिजिट वृद्धि देखने को मिल सकती है। हालांकि, वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि जैसे जोखिम भी हैं। जानें कि इस समय निवेश की सही रणनीति क्या होनी चाहिए और क्यों यह समय निवेश के लिए उपयुक्त है।
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क्या भारतीय शेयर बाजार में निवेश का सही समय आ गया है? जानें क्यों है ये अवसर खास!

भारतीय शेयर बाजार में नया अवसर


हाल ही में भारतीय शेयर बाजार ने एक महत्वपूर्ण करेक्शन का अनुभव किया है, जिससे निवेशकों के लिए नए अवसर उत्पन्न हुए हैं। सितंबर 2024 के उच्चतम स्तर से 20-30 प्रतिशत की गिरावट ने बाजार को फिर से आकर्षक बना दिया है। आइए जानते हैं कि अब बाजार क्यों सस्ता और निवेश के लिए बेहतर नजर आ रहा है।


बाजार की स्थिति में बदलाव

सितंबर 2024 के उच्चतम स्तर से इंडेक्स में 20-30 प्रतिशत की कमी आई है। वित्त वर्ष 2025 में थोड़ी सुस्ती देखने को मिली, लेकिन 2026 की पहली तीन तिमाहियों में कंपनियों की आय में मजबूती आई है। वर्तमान में, निफ्टी 50 अपने दीर्घकालिक औसत से लगभग 10 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे यह ओवरहीटेड स्थिति से बाहर निकल आया है।


कंपनियों की आय का सकारात्मक दृष्टिकोण

विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 और 2028 में कंपनियों की आय में डबल डिजिट वृद्धि देखने को मिल सकती है। जब शेयर की कीमतें गिरती हैं और कंपनियों का लाभ बढ़ता है, तो वैल्यूएशन अपने आप आकर्षक हो जाती है।


भारतीय अर्थव्यवस्था के सकारात्मक संकेत

वैश्विक तनाव के बावजूद, भारत की घरेलू स्थिति मजबूत बनी हुई है। भारत की जीडीपी वृद्धि 6.8 से 7 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित दायरे में है, और खपत तथा क्रेडिट की गति भी स्थिर बनी हुई है।


जोखिम और स्वस्थ करेक्शन

वैश्विक संघर्षों के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि महंगाई को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट वैश्विक कारकों के कारण आई है, न कि भारतीय अर्थव्यवस्था की कमजोरी के कारण। इसे एक 'स्वस्थ करेक्शन' माना जा रहा है।


निवेश की रणनीति

विशेषज्ञों की सलाह है कि इस समय एक साथ पूरा पैसा न लगाएं। निवेश को अगले कुछ हफ्तों या महीनों में किश्तों में बांटकर करें। जो लोग पहले से SIP कर रहे हैं, उनके लिए यह गिरावट फायदेमंद है क्योंकि उन्हें कम कीमत पर अधिक यूनिट्स मिल रही हैं। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, ऐसी गिरावट के बाद बाजार अक्सर 2 से 3 महीनों में रिकवर कर जाता है।