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क्या रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से आम परिवारों का बजट बिगड़ जाएगा?

हाल ही में रसोई गैस की कीमतों में 60 रुपये की वृद्धि हुई है, जिससे दिल्ली में सिलेंडर की कीमत 913 रुपये हो गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ेगा, खासकर मध्यम वर्ग पर। विभिन्न शहरों में गैस की कीमतें अलग-अलग हैं, और उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को सब्सिडी मिलती है। होटल उद्योग पर भी इस वृद्धि का प्रभाव पड़ सकता है। जानें आगे क्या होगा और क्या महंगाई और बढ़ेगी।
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क्या रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से आम परिवारों का बजट बिगड़ जाएगा?

रसोई गैस की कीमतों में नई वृद्धि


हाल ही में रसोई गैस की कीमतों में एक बार फिर वृद्धि की गई है। सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की है, जिससे अब दिल्ली में 14.2 किलो का गैस सिलेंडर 913 रुपये में उपलब्ध होगा। पहले इसकी कीमत 853 रुपये थी, जिससे यह स्पष्ट है कि एक झटके में 60 रुपये का इजाफा हुआ है। तेल कंपनियों का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है, विशेषकर पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य तनाव के कारण गैस और तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इसका प्रभाव भारत में भी देखा जा रहा है।


क्या रसोई का बजट प्रभावित होगा?

गैस की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। जो परिवार हर महीने सिलेंडर खरीदते हैं, उनके खर्च में वृद्धि हो जाती है। पहले से ही खाद्य वस्तुएं महंगी हो चुकी हैं, और गैस की कीमतों में वृद्धि से समस्याएं और बढ़ेंगी। मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा परिवार इस स्थिति से अधिक प्रभावित होते हैं, क्योंकि उन्हें सब्सिडी नहीं मिलती। इस कारण से हर महीने का बजट बिगड़ जाता है, और यही कारण है कि लोग गैस की कीमतों में बदलाव पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं।


क्या विभिन्न शहरों में कीमतें अलग हैं?

भारत में गैस सिलेंडर की कीमतें हर शहर में थोड़ी भिन्न होती हैं, जो स्थानीय टैक्स और वैट के कारण होती हैं। दिल्ली में सिलेंडर की कीमत अब 913 रुपये है, जबकि मुंबई में यह 912.50 रुपये है। कोलकाता में यह सिलेंडर 939 रुपये में मिलेगा, और चेन्नई में इसकी कीमत 928.50 रुपये है। इस प्रकार, विभिन्न राज्यों में कीमतों में थोड़ा अंतर दिखाई देता है, लेकिन कुल मिलाकर हर जगह कीमतें बढ़ी हैं।


क्या उज्ज्वला योजना से राहत मिलेगी?

सरकार ने उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को राहत प्रदान की है। इस योजना के तहत गरीब परिवारों को गैस पर सब्सिडी मिलती है। लगभग 10 करोड़ परिवार इस योजना का लाभ उठा रहे हैं, जिन्हें हर सिलेंडर पर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है। यह लाभ साल में 12 सिलेंडर तक मिलता है, जिससे गरीब परिवारों पर कीमतों का प्रभाव कम होगा। सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों की रसोई को सुरक्षित और सुलभ बनाना है।


क्या होटल उद्योग पर दबाव बढ़ेगा?

घरेलू गैस के साथ-साथ कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। होटल और रेस्टोरेंट में उपयोग होने वाले 19 किलो के सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे अब दिल्ली में यह सिलेंडर 1883 रुपये का हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि मार्च की शुरुआत में इसमें 28 रुपये की वृद्धि हुई थी। इस साल कमर्शियल गैस की कीमतों में कुल 302.50 रुपये की वृद्धि हो चुकी है, जिसका असर होटल और खाद्य उद्योग पर पड़ सकता है।


क्या पिछले साल भी कीमतें बढ़ी थीं?

एलपीजी की कीमतों में यह पहली बार वृद्धि नहीं हुई है। पिछले साल अप्रैल में भी गैस सिलेंडर की कीमत में 50 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इस प्रकार, लगभग 11 महीनों में यह दूसरी बार है जब कीमतें बढ़ाई गई हैं। तेल कंपनियां समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार कीमतों में बदलाव करती हैं। यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर भारत में भी दिखाई देता है। यही कारण है कि एलपीजी की कीमतें स्थिर नहीं रहतीं।


क्या भविष्य में और महंगाई आएगी?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या गैस की कीमतें आगे और बढ़ेंगी। ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। यदि पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है, तो तेल और गैस की कीमतें ऊंची रह सकती हैं। ऐसे में भारत में भी कीमतें बढ़ सकती हैं। लेकिन यदि हालात सामान्य होते हैं, तो राहत मिल सकती है। फिलहाल, आम परिवारों को अपने मासिक खर्च का ध्यान और अधिक रखना पड़ सकता है।