गर्मी और महंगाई का संकट: क्या बढ़ेगी खाद्य कीमतें?
गर्मी और महंगाई का बढ़ता संकट
नई दिल्ली: देश इस समय अत्यधिक गर्मी का सामना कर रहा है, जिससे महंगाई की नई समस्या उत्पन्न हो रही है। उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, जिससे बिजली की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष की गर्मी और सामान्य से कम वर्षा के कारण महंगाई में वृद्धि का खतरा है।
कम वर्षा का प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्वानुमान से अधिक हो सकती है। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव के चलते तेल की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन इस बार गर्मी और मौसम की अनियमितता मुख्य कारण बन रही है। आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ने की संभावना है।
कम बारिश से बढ़ेगी मुसीबत
सरकार ने जून से सितंबर के मानसून सीजन में सामान्य से कम वर्षा की भविष्यवाणी की है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड बैंकिंग ग्रुप के अर्थशास्त्री धीरज निम का कहना है कि लगातार गर्मी और अनियमित मानसून खाद्य पदार्थों की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। कृषि गतिविधियों में बाधा आने से फसल उत्पादन पर असर पड़ेगा, जिससे पहले से बढ़ती ऊर्जा लागत के साथ नया आर्थिक दबाव उत्पन्न होगा।
महंगाई दर 5% के पार जा सकती है
5% के पार पहुंचेगी महंगाई!
धीरज निम का अनुमान है कि चालू वित्तीय वर्ष में औसत महंगाई दर लगभग 5 प्रतिशत रहेगी, जो आरबीआई के 4.6 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है। पिछले वर्ष महंगाई दर 4 प्रतिशत से नीचे रही थी, मुख्यतः सब्जियों की सस्ती कीमतों के कारण। लेकिन इस बार मौसम की अनियमितता के कारण स्थिति बदल सकती है। गर्मी, कमजोर मानसून और तेल की बढ़ती कीमतें मिलकर महंगाई को 5 प्रतिशत के पार ले जा सकती हैं।
आर्थिक संकट की आशंका
इकोनॉमी के लिए बड़ा संकट
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य उत्पादों का वजन 37 प्रतिशत है, जो महंगाई को काफी प्रभावित करता है। देश की 60 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है और कृषि पर निर्भर है। खराब फसल से किसानों की आय प्रभावित होगी, ग्रामीण मांग में कमी आएगी और आर्थिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि खाद्य कीमतों में वृद्धि और ऊर्जा की बढ़ती लागत आरबीआई की मौद्रिक नीति को जटिल बना सकती है।
अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर
US-ईरान युद्ध, क्रूड ने बढ़ाई टेंशन
ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता का कहना है कि यदि मानसून कमजोर रहा तो महंगाई 5.8 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। उन्होंने 2023 का उदाहरण दिया जब वर्षा 5.4 प्रतिशत कम हुई थी, तब फसल उत्पादन 3.5 प्रतिशत घटा और खाद्य महंगाई 8 प्रतिशत पर पहुँच गई। कम वर्षा के कारण किसानों को डीजल आधारित सिंचाई पर निर्भर होना पड़ेगा, जिससे लागत बढ़ेगी। अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर हैं, जो स्थिति को और जटिल बना रहा है।
