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गिग वर्कर्स की समस्याएं: सरकार की पहल और हड़ताल की चेतावनी

गिग वर्कर्स को हाल ही में केंद्र सरकार से कुछ राहत मिली है, लेकिन उनकी बुनियादी समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा और न्यूनतम वेतन जैसे मुद्दे अनसुलझे हैं। 30 जनवरी को संभावित हड़ताल की चेतावनी दी गई है, जिसमें गिग वर्कर्स अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने की योजना बना रहे हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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गिग वर्कर्स की समस्याएं: सरकार की पहल और हड़ताल की चेतावनी

नई दिल्ली में गिग वर्कर्स की स्थिति


नई दिल्ली: हालांकि केंद्र सरकार ने गिग वर्कर्स को कुछ राहत प्रदान की है, लेकिन उनकी मूल समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के निर्देशों के बाद, फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और जेप्टो ने अपने विज्ञापनों से 10 मिनट की डिलीवरी का दावा हटा दिया है।


डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा पर जोर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि, डिलीवरी पार्टनर्स का कहना है कि समय के दबाव में थोड़ी राहत मिली है, लेकिन फिक्स्ड इनकम, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।


ऑर्डर की अधिकता और सुरक्षा का खतरा

ऑर्डर जितने ज्यादा, खतरा उतना बड़ा:


दिल्ली के एक डिलीवरी बॉय राकेश कुमार ने कहा, "सरकार का निर्णय अच्छा है, अब हमें 10 मिनट की जल्दी में नहीं रहना पड़ेगा। लेकिन हमारी आय पूरी तरह से ऑर्डर पर निर्भर है। अधिक कमाई के लिए तेज चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।"


एक अन्य डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि अधिक ऑर्डर और इंसेंटिव की होड़ में सड़क हादसों का शिकार सबसे ज्यादा डिलीवरी बॉय बनते हैं, जबकि कंपनियां सुरक्षा उपायों पर ध्यान नहीं देतीं।


सरकार की सख्ती और वर्कर्स की असंतोष

हादसों के बाद सरकार सख्त, लेकिन वर्कर्स संतुष्ट नहीं:


हाल के महीनों में तेज गति और समय के दबाव के कारण डिलीवरी पार्टनर्स के सड़क हादसों की कई शिकायतें आई थीं। श्रम मंत्रालय ने प्लेटफॉर्म कंपनियों के साथ बैठक में कहा कि वर्कर्स की जान की कीमत पर मुनाफा स्वीकार्य नहीं है। फिर भी, गिग वर्कर्स का मानना है कि केवल विज्ञापनों से समय सीमा हटाना पर्याप्त नहीं है।


हड़ताल की चेतावनी

30 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल की चेतावनी:


गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन के कोऑर्डिनेटर निर्मल गोराना ने कहा, "हम सरकार के कदम का स्वागत करते हैं, लेकिन असली मांग है कि गिग वर्कर्स को कामगार का दर्जा मिले। कंपनियों को फिक्स्ड पे तय करनी चाहिए, ताकि हर ऑर्डर के लिए जान जोखिम में न डालनी पड़े।" उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 30 जनवरी तक मांगें पूरी नहीं हुईं, तो देशभर के गिग वर्कर्स हड़ताल करेंगे।


मुख्य मांगें

न्यूनतम वेतन, बीमा और सुरक्षा की मांग:


यूनियन की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन, स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा, साप्ताहिक अवकाश और सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं। यूनियन का आरोप है कि प्लेटफॉर्म कंपनियां करोड़ों का मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन गिग वर्कर्स के पास न तो छुट्टी है और न ही कोई ठोस सुरक्षा कवर।


सेवाओं पर हड़ताल का प्रभाव

बड़े शहरों में सेवाएं ठप होने की आशंका:


यदि 30 जनवरी को हड़ताल होती है, तो इसका सीधा असर क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी सेवाओं पर पड़ेगा, विशेषकर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और अन्य बड़े शहरों में। गिग वर्कर्स सरकार से ठोस निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं।


इनपुट

इनपुट- पंकज राय