चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग: भारत में सुरक्षा और विश्वसनीयता की नई पहल
चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग का महत्व
भारत में अब चांदी के गहने, बर्तन और कलाकृतियों की खरीदारी भी सोने के आभूषणों की तरह सुरक्षित और भरोसेमंद बनने जा रही है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने के लिए एक मजबूत नियामक ढांचे पर काम कर रहा है। इस संबंध में जानकारी देते हुए बीआईएस के महानिदेशक संजय गर्ग ने उद्योग संगठन फिक्की के एक कार्यक्रम में बताया कि चांदी के बाजार की संरचना सोने से भिन्न है, इसलिए इसे लागू करने से पहले सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया जा रहा है।
हॉलमार्किंग की प्रक्रिया
चांदी की हॉलमार्किंग 2005 से स्वैच्छिक रही है, और सितंबर 2025 से हॉलमार्क किए गए चांदी के उत्पादों पर एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन (एचयूआईडी) नंबर होगा, जिससे खरीदार शुद्धता की पुष्टि कर सकेंगे। संजय गर्ग ने कहा कि चांदी की हॉलमार्किंग सोने की तुलना में अधिक जटिल है, जो इसके बाजार के स्वरूप के कारण है।
चांदी के गहनों की बिक्री
गर्ग ने बताया कि चांदी के गहने और वस्तुएं छोटी और बड़ी दोनों तरह की दुकानों में बिकती हैं, जिसमें चांदी के फर्नीचर जैसी श्रेणियां भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, "हम इस प्रक्रिया को लागू करने का अध्ययन कर रहे हैं।" बीआईएस में हॉलमार्किंग का संचालन केवल पांच लोगों द्वारा किया जाता है, जबकि अन्य कार्यबल निजी या आउटसोर्स किया जाता है।
सावधानी से आगे बढ़ने की आवश्यकता
गर्ग ने कहा, "हम जानबूझकर धीमे चल रहे हैं ताकि कोई गलती न हो। अनिवार्य करने से पहले हम व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करना चाहते हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि चांदी की हॉलमार्किंग को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य किया जाएगा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में हॉलमार्क किए गए चांदी के गहनों की संख्या 59 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 2024-25 में 32 लाख थी। वर्तमान में, बीआईएस द्वारा मान्यता प्राप्त लगभग 230 परख एवं हॉलमार्किंग केंद्र चांदी के गहनों की जांच कर रहे हैं।
