चीनी निर्यात पर रोक का शेयर बाजार पर प्रभाव: कंपनियों के शेयरों में गिरावट
शेयर बाजार में चीनी कंपनियों के शेयरों में गिरावट
केंद्र सरकार द्वारा चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय का प्रभाव शेयर बाजार में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। गुरुवार को व्यापार की शुरुआत के साथ ही चीनी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई, जिसमें कई प्रमुख कंपनियों के शेयर तीन प्रतिशत से अधिक टूट गए। निवेशकों के बीच इस निर्णय को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि निर्यात पर रोक से कंपनियों की आय और कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है.
सरकार का निर्णय और उसके कारण
सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 30 सितंबर 2026 तक चीनी निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्णय लिया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत विदेश व्यापार महानिदेशालय ने कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात को 'प्रतिबंधित' से 'निषिद्ध' श्रेणी में डाल दिया है.
कंपनियों के शेयरों में गिरावट
इस निर्णय के बाद बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयर में सबसे अधिक गिरावट देखी गई, जो शुरुआती कारोबार में 3.14 प्रतिशत गिरकर 531.65 रुपये पर पहुंच गया। धामपुर शुगर मिल्स का शेयर भी 3.18 प्रतिशत गिरकर 148.88 रुपये पर कारोबार करता नजर आया.
उत्तम शुगर मिल्स के शेयर में 3.28 प्रतिशत की कमी आई, जो 245.10 रुपये पर पहुंच गया। द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज का शेयर 3.64 प्रतिशत गिरकर 45 रुपये तक पहुंच गया.
बजाज हिंदुस्तान शुगर के शेयर में 2.14 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि बन्नारी अम्मन शुगर्स का शेयर 1.38 प्रतिशत गिरकर 3608.10 रुपये पर पहुंच गया.
अन्य कंपनियों की स्थिति
ईआईडी पैरी इंडिया के शेयर में 0.79 प्रतिशत की गिरावट आई, और त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज का शेयर 0.80 प्रतिशत कमजोर हुआ। श्री रेणुका शुगर के शेयर में भी हल्की गिरावट देखी गई.
डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज का शेयर 1.65 प्रतिशत गिरकर 360 रुपये पर पहुंच गया, जबकि गोदावरी बायोरिफाइनरीज और अवध शुगर एंड एनर्जी के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली.
धामपुर बायो ऑर्गेनिक्स की स्थिति
हालांकि, इस गिरावट के बीच धामपुर बायो ऑर्गेनिक्स का शेयर थोड़ी मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया और इसमें मामूली बढ़त देखी गई.
भारत की चीनी उत्पादन स्थिति
भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में से एक है। सरकार का मानना है कि निर्यात पर रोक लगाकर घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है और कीमतों को नियंत्रित रखा जा सकता है.
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पकालिक में इस निर्णय का प्रभाव चीनी कंपनियों की कमाई और निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए यह निर्णय राहत देने वाला साबित हो सकता है.
