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जापान में पीएम मोदी के दौरे के दौरान ट्रंप को बड़ा झटका

प्रधानमंत्री मोदी के जापान दौरे के दौरान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा झटका लगा है। जापान ने अमेरिका के साथ अरबों डॉलर के एक महत्वपूर्ण समझौते को अचानक रोक दिया है। यह डील 550 अरब डॉलर के मेगा निवेश से संबंधित है। जानें इस डील के पीछे की कहानी और जापान की नीतियों का ट्रंप पर प्रभाव।
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जापान में पीएम मोदी के दौरे के दौरान ट्रंप को बड़ा झटका

ट्रंप की नीतियों पर जापान का पलटवार

प्रधानमंत्री मोदी के जापान दौरे के दौरान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा झटका लगा है। जापान ने अमेरिका के साथ अरबों डॉलर के एक महत्वपूर्ण समझौते को अचानक रोक दिया है। पीएम मोदी का जापान पहुंचते ही भव्य स्वागत हुआ, लेकिन इसी बीच ट्रंप को एक गंभीर झटका मिला। यह झटका 45 लाख 92 हजार 500 करोड़ रुपये के एक डील से संबंधित है। 550 अरब डॉलर के मेगा निवेश समझौते की प्रक्रिया को अचानक रोक दिया गया है। जापान के व्यापार सलाहकार रयोसेई को इस डील को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका जाना था, लेकिन उन्होंने अंतिम क्षण में यह यात्रा रद्द कर दी।


ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति का असर

यह ध्यान देने योग्य है कि रयोसेई ने पीएम मोदी के जापान पहुंचने के समय इस यात्रा को रद्द किया। ट्रंप ने अपनी अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत कई देशों पर आयात टैरिफ बढ़ाए हैं, जिसमें जापान भी शामिल है। जापान पर पहले 25 प्रतिशत का सामान्य टैरिफ लगाया गया था, जो विशेष रूप से ऑटोमोबाइल और ऑटोपार्ट जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा था। जुलाई 2025 में, जापान और अमेरिका ने एक व्यापार समझौते पर सहमति जताई थी, जिसमें जापान के आयात टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत करने का वादा किया गया था। इसके बदले में, जापान ने अमेरिका में 550 अरब डॉलर का निवेश पैकेज देने का प्रस्ताव रखा।


जापान के हितों की सुरक्षा

जापान का कहना है कि यह निवेश तभी किया जाएगा जब यह जापान के हितों को लाभ पहुंचाएगा। दोनों पक्षों के बीच मतभेद हैं। जापान चाहता है कि निवेश से दोनों देशों को समान लाभ हो, जबकि ट्रंप केवल अपने लाभ को प्राथमिकता देते हैं। 550 अरब डॉलर की डील रुकने का एक बड़ा कारण जापानी चावल भी है। जापान और अमेरिका के बीच समझौते की प्रक्रिया मई से चल रही थी। अब सवाल यह है कि ट्रंप हमेशा अपनी शर्तों पर निवेश चाहते हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर लिखा था कि जापान ने अमेरिका के लिए अपना कृषि क्षेत्र खोल दिया है।


चावल का मुद्दा

यह मामला सीधे चावल से जुड़ा है। जापानी किसान कभी नहीं चाहते कि अमेरिकी चावल उनके बाजारों में आए। इस मुद्दे पर पहले भी विरोध हो चुका है। दशकों से जापान में अमेरिकी चावल का विरोध होता रहा है, क्योंकि उन्हें लगता है कि सस्ता चावल उनके किसानों के बाजार को खत्म कर देगा। जापानी लोग स्टिकी राइस का सेवन करते हैं और इसे पौष्टिक मानते हैं।