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जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ पश्चिम एशिया के तनाव के कारण टल सकता है

रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल शाखा जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ पश्चिम एशिया में तनाव के कारण टल सकता है। क्रेडिटसाइट्स के अनुसार, यह आईपीओ अब वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में आ सकता है। पहले इसे मई में लाने की योजना थी, जिसमें कंपनी अपनी हिस्सेदारी बेचकर लगभग चार अरब डॉलर जुटाने की उम्मीद कर रही थी। जानें इस आईपीओ के पीछे की वित्तीय रणनीतियाँ और कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति के बारे में।
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जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ पश्चिम एशिया के तनाव के कारण टल सकता है

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ स्थगित होने की संभावना

रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल शाखा जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही तक टल सकता है। यह आकलन क्रेडिटसाइट्स द्वारा बुधवार को प्रस्तुत किया गया।


क्रेडिटसाइट्स ने वित्त वर्ष 2025-26 के परिणामों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रिलायंस के प्रबंधन ने वित्तीय नतीजों की चर्चा के दौरान जियो के आईपीओ को बहुत निकट बताया था।


पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि यह आईपीओ मई में आ सकता है, जिसमें रिलायंस अपनी लगभग 67 प्रतिशत हिस्सेदारी में से 2.5 से 3 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर लगभग चार अरब डॉलर (लगभग 37,500 करोड़ रुपये) जुटा सकती है।


हालांकि, क्रेडिटसाइट्स का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण बाजार की स्थिति प्रभावित हो सकती है, जिससे आईपीओ की समयसीमा में बदलाव आ सकता है।


इसके अलावा, जियो की सूचीबद्धता से प्राप्त पूंजी का उपयोग कर्ज कम करने और पूंजीगत व्यय में किया जाएगा, जिससे कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के मुकाबले मजबूत हो सकती है।


रिलायंस ने वित्त वर्ष 2025-26 में 10 प्रतिशत राजस्व वृद्धि और कर-पूर्व आय में आठ प्रतिशत वृद्धि दर्ज की है, जिसमें खुदरा और दूरसंचार क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


क्रेडिटसाइट्स ने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में रिलायंस का पूंजीगत व्यय बढ़कर 1.5 से 1.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो पिछले वर्ष के 1.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। यह निवेश मुख्य रूप से पेट्रोरसायन विस्तार, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी निर्माण और डेटा केंद्रों पर केंद्रित होगा।