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जीएसटी में बदलाव: विपक्षी राज्यों का समर्थन, टैक्स स्लैब घटाने की तैयारी

जीएसटी प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी हो रही है, जिसमें विपक्ष शासित आठ राज्यों ने टैक्स स्लैब घटाने का समर्थन किया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसकी पुष्टि की है। वर्तमान में जीएसटी में कई टैक्स स्लैब हैं, जो व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए समस्याएं उत्पन्न कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स स्लैब की संख्या कम करने से जीएसटी के 'एक राष्ट्र, एक टैक्स' के उद्देश्य को पूरा किया जा सकेगा। जानें इस प्रस्ताव के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभाव।
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जीएसटी में बदलाव: विपक्षी राज्यों का समर्थन, टैक्स स्लैब घटाने की तैयारी

जीएसटी में संभावित बदलाव

देश की आर्थिक स्थिति और आम नागरिकों की जेब से सीधे जुड़े जीएसटी (GST) प्रणाली में एक बार फिर से बड़े बदलावों की योजना बनाई जा रही है। पहले से मौजूद विभिन्न टैक्स स्लैब (GST slabs) के कारण कई समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं, लेकिन अब एक सकारात्मक खबर आई है – विपक्ष शासित आठ राज्यों ने जीएसटी के इन टैक्स स्लैबों को कम करने के लिए केंद्र सरकार को अपना समर्थन दिया है। कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने इस बात की पुष्टि की है।


जीएसटी में वर्तमान में कई टैक्स स्लैब हैं, जैसे 5%, 12%, 18% और 28%, जिसका अर्थ है कि विभिन्न सामान और सेवाओं पर अलग-अलग दर से जीएसटी लागू होता है। इस प्रणाली के कई नुकसान हैं: पहले, उलझन और हिसाब-किताब की समस्या, जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए यह समझना कठिन हो जाता है कि किस चीज़ पर कितना टैक्स है। दूसरे, फुटकर की समस्या, जहां समान उत्पादों पर अलग-अलग स्लैब लगने से व्यापार में बाधाएं आती हैं। तीसरे, इतनी अधिक स्लैब होने से टैक्स प्रणाली की दक्षता में कमी आती है।


अनेक आर्थिक विशेषज्ञ और उद्योग संगठन लंबे समय से इस बात की मांग कर रहे थे कि टैक्स स्लैब की संख्या को कम किया जाए, ताकि जीएसटी के 'एक राष्ट्र, एक टैक्स' के मूल उद्देश्य को पूरा किया जा सके।


दिलचस्प बात यह है कि आमतौर पर केंद्र के निर्णयों का विरोध करने वाले विपक्ष शासित राज्यों ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति जताई है। जयराम रमेश के बयान से स्पष्ट है कि आठ विपक्षी राज्यों ने जीएसटी स्लैब की संख्या कम करने के कदम का समर्थन किया है। यह दर्शाता है कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार है जिस पर व्यापक सहमति बन रही है।