डोनाल्ड ट्रंप का क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों पर प्रस्ताव: अमेरिकी बैंकिंग क्षेत्र में हलचल
बैंकिंग क्षेत्र में उथल-पुथल
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों को सीमित करने का प्रस्ताव अमेरिकी बैंकिंग क्षेत्र में हलचल पैदा कर रहा है। उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से लाए गए इस कदम के खिलाफ देश के प्रमुख बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुख खुलकर सामने आए हैं। उनका मानना है कि यह निर्णय न केवल बैंकिंग उद्योग के लिए, बल्कि समग्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
ट्रंप का प्रस्ताव और उसके प्रभाव
मध्यावधि चुनावों से पहले, ट्रंप ने 'किफायती लागत' को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दरों की अधिकतम सीमा तय करने का संकेत दिया है। हालांकि, बाजार और बैंकिंग क्षेत्र इसे मुक्त अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के खिलाफ मानते हैं और इसे वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा बताते हैं।
सहयोग से टकराव की ओर
शुरुआत में, ट्रंप प्रशासन के कई निर्णयों को बैंकों ने सकारात्मक रूप से लिया था। जुलाई में 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल' पर हस्ताक्षर के बाद कर कटौती का नया दौर शुरू हुआ और उपभोक्ता वित्तीय संरक्षण ब्यूरो के बजट में लगभग 50 प्रतिशत की कटौती की गई। लेकिन अब क्रेडिट कार्ड ब्याज पर सीमा लगाने के प्रस्ताव ने इस रिश्ते में दरार डाल दी है।
फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता पर खतरा
बीएनवाई मेलॉन के सीईओ रॉबिन विंस ने चेतावनी दी है कि ब्याज दरों में राजनीतिक हस्तक्षेप से फेडरल रिजर्व की स्वायत्तता खतरे में पड़ सकती है। उनके अनुसार, इससे बॉंड बाजार कमजोर हो सकता है और ब्याज दरें घटने के बजाय बढ़ भी सकती हैं।
शेयर बाजार में गिरावट
ट्रंप के इस प्रस्ताव के बाद क्रेडिट कार्ड कंपनियों और बड़े बैंकों के शेयरों में गिरावट आई है। अमेरिकन एक्सप्रेस, जेपी मॉर्गन, सिटीग्रुप और कैपिटल वन जैसी कंपनियों के शेयरों में कमी आई है। निवेशकों को चिंता है कि ब्याज दरों पर सीमा लगने से बैंकों के मुनाफे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
उद्योग की प्रतिक्रिया
जेपी मॉर्गन के मुख्य वित्तीय अधिकारी जेफरी बार्नम ने स्पष्ट किया है कि बैंकिंग क्षेत्र इस निर्णय के खिलाफ हर कानूनी और नीतिगत उपाय अपनाएगा। जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमोन ने कहा कि वे फेडरल रिजर्व के हर निर्णय से सहमत नहीं हो सकते, लेकिन केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण मानते हैं।
कम आय वर्ग पर प्रभाव
डेल्टा एयरलाइंस के सीईओ एड बैस्टियन ने चेतावनी दी है कि ब्याज दरों पर सीमा लगाने का सबसे अधिक नुकसान कम आय वाले उपभोक्ताओं को होगा। उनके अनुसार, जोखिम बढ़ने पर बैंक ऐसे ग्राहकों को क्रेडिट देना बंद कर सकते हैं।
स्वाइप फीस पर नियंत्रण
तनाव को और बढ़ाते हुए, ट्रंप ने सीनेटर रोजर मार्शल द्वारा पेश 'क्रेडिट कार्ड प्रतिस्पर्धा अधिनियम' का समर्थन किया है। इस विधेयक का उद्देश्य व्यापारियों से वसूले जाने वाले 'स्वाइप शुल्क' पर नियंत्रण लगाना है। बैंकों को डर है कि यह कदम उनके राजस्व पर एक और सीधा प्रहार साबित होगा।
भविष्य की चुनौतियाँ
क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों में कमी के ट्रंप के प्रस्ताव ने अमेरिकी बैंकिंग क्षेत्र को एकजुट कर दिया है। यह टकराव अब केवल नीतिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण बन चुका है। आने वाले समय में यह संघर्ष तय करेगा कि अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था में नीति का प्रभाव अधिक होगा या बाजार की स्वतंत्रता का।
