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तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल पर भारी नुकसान, जानें कारण

पेट्रोलियम मंत्रालय ने हाल ही में आंकड़े जारी किए हैं, जिनमें बताया गया है कि तेल कंपनियां पेट्रोल पर 24 रुपये और डीजल पर 104 रुपये प्रति लीटर का घाटा सहन कर रही हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और सरकार की कोशिशें।
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तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल पर भारी नुकसान, जानें कारण

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़े


पेट्रोलियम मंत्रालय ने हाल ही में जारी किए आंकड़े, बताया कि पेट्रोल पर 24 और डीजल पर 104 रुपये प्रति लीटर का नुकसान झेल रही हैं तेल कंपनियां।


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति में रुकावट के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। भारत अपनी तेल की जरूरत का अधिकांश हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इस स्थिति का सीधा प्रभाव देश की तेल कंपनियों पर पड़ रहा है। सरकार का प्रयास है कि पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रहें ताकि आम जनता पर इसका नकारात्मक असर न पड़े। हाल ही में पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े सभी को चौंका देने वाले हैं।


मंत्रालय का बयान

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि के बावजूद घरेलू बाजार में दाम स्थिर रखने के कारण कंपनियों को पेट्रोल पर 24 रुपये और डीजल पर 104 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है, और यह घाटा कंपनियों द्वारा सहन किया जा रहा है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश में ईंधन की आपूर्ति सामान्य है। अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार सुरक्षित है और रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से कार्य कर रही हैं।


महंगाई का खतरा

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, और वर्तमान में क्रूड की कीमतें लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं। इन बढ़ती कीमतों के कारण भारत में महंगाई बढ़ने की संभावना है। भारतीय तेल कंपनियों पर लगातार दबाव बना हुआ है क्योंकि उन्हें पेट्रोल और डीजल पर भारी घाटा सहन करना पड़ रहा है।


हाल ही में विदेशी ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो भारत में खुदरा महंगाई दर 6 प्रतिशत के पार जा सकती है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के सहनशीलता बैंड (2 से 6 प्रतिशत) की ऊपरी सीमा से अधिक है, और इसके पार जाने पर आरबीआई को ब्याज दरों में वृद्धि के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।