तेल बाजार में अमेरिका-ईरान तनाव का असर: क्या बढ़ेंगी कीमतें?
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में चिंता का माहौल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में चिंता को बढ़ा दिया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दी है, जो कि विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस मार्ग से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति होती है, साथ ही बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का भी परिवहन होता है।
ब्रोकरेज कंपनियों की चिंताएं
यदि यह जलडमरूमध्य बाधित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। वित्तीय संस्थानों और ब्रोकरेज कंपनियों ने इस स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की है। DBS Bank के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद हो जाता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। Goldman Sachs का मानना है कि यदि तेल की आपूर्ति लगभग पांच सप्ताह तक बाधित रहती है, तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच सकती हैं।
बाजार में पहले से ही असर दिखने लगा है
वर्तमान में, ब्रेंट क्रूड की कीमत पहले ही लगभग 13 प्रतिशत बढ़कर 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। JPMorgan Chase और Bernstein जैसे वित्तीय संस्थानों ने भी चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव जारी रहता है, तो तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर जा सकती हैं।
भारत पर संभावित प्रभाव
इस स्थिति का सबसे अधिक प्रभाव उन देशों पर पड़ेगा जो तेल आयात पर निर्भर हैं, और भारत भी इनमें शामिल है। भारत अपने कुल तेल आयात का लगभग आधा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से प्राप्त करता है, जिसमें रोजाना लगभग 26 लाख बैरल कच्चा तेल आता है। यदि आपूर्ति लंबे समय तक बाधित होती है, तो भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक संतुलन बनाए रखना कठिन हो सकता है।
आर्थिक संतुलन की चुनौतियाँ
ING Group के अनुसार, यदि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में केवल 10 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो उभरती अर्थव्यवस्थाओं के चालू खाते का घाटा 0.40 से 0.60 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जिससे महंगाई और आर्थिक विकास दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
हालांकि अमेरिका के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार है, जिसका उपयोग आपात स्थिति में किया जा सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संकट गंभीर हो जाता है, तो यह भंडार लंबे समय तक आपूर्ति की कमी को संतुलित नहीं कर पाएगा। वर्तमान में, तेल बाजार की दिशा अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पर निर्भर है। जब तक स्थिति सामान्य होने के संकेत नहीं मिलते, तब तक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बाजार में अनिश्चितता बनी रहने की संभावना है।
