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दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि

दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 में 29 प्रतिशत का उछाल आया है। हालांकि, पेट्रोल गाड़ियों की प्रमुखता अभी भी बरकरार है, जबकि डीजल गाड़ियों की मांग में कमी आई है। जानें इस बदलाव के पीछे की वजहें और सरकार की नई नीतियों के प्रभाव के बारे में।
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दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि

दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता

दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ चल रही मुहिम अब सकारात्मक परिणाम दिखाने लगी है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की रजिस्ट्रेशन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में, दिल्ली में EV रजिस्ट्रेशन में 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष 83,512 इलेक्ट्रिक गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हुआ था, जबकि इस वर्ष यह संख्या 1.07 लाख के पार पहुंच गई है।


पेट्रोल गाड़ियों की प्रमुखता बरकरार

हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद, पेट्रोल गाड़ियों की प्रमुखता अभी भी कायम है। स्वतंत्र अनुसंधान संस्था 'एनवायरोकैटेलिस्ट्स' के अनुसार, दिल्ली के ऑटो बाजार में 73 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी अब भी पेट्रोल और एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों की है। यह दर्शाता है कि लोग नई तकनीक को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पुरानी आदतों को छोड़ने में समय लगेगा।


डीजल गाड़ियों की मांग में कमी

हालांकि EV की बिक्री में वृद्धि हुई है, पेट्रोल गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन भी 5.30 लाख से बढ़कर 6.21 लाख हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली के लोग अब डीजल गाड़ियों से दूर होते जा रहे हैं, क्योंकि डीजल गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन घटकर 11,498 रह गया है, जो 2019 के बाद का सबसे कम आंकड़ा है। इसके विपरीत, हाइब्रिड गाड़ियों की बिक्री में तेजी आई है, जो 15 हजार से बढ़कर 32 हजार के पार पहुंच गई हैं।


EV की बिक्री में वृद्धि के कारण

एनवायरोकैटेलिस्ट्स के सुनील दहिया ने बताया कि भविष्य में पेट्रोल की मांग में कमी आ सकती है। इसका मुख्य कारण दिल्ली सरकार की नई EV नीति है, जिसमें 'स्क्रैपेज इंसेंटिव' को प्रमुखता दी गई है। यदि आप अपनी पुरानी BS-IV या उससे पहले की गाड़ी को अधिकृत सेंटर पर स्क्रैप करते हैं, तो नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर आपको आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके लिए आपको स्क्रैप सर्टिफिकेट मिलने के 6 महीने के भीतर नई EV खरीदनी होगी।


सरकार की योजनाएं

सरकार का उद्देश्य इलेक्ट्रिक गाड़ियों को आम जनता के लिए सस्ती बनाना है। संभावना है कि 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह माफ कर दी जाएगी, जो मार्च 2030 तक जारी रह सकती है। वर्तमान में दिल्ली के कुल बाजार में EV की हिस्सेदारी लगभग 12.7 प्रतिशत है, लेकिन टू-व्हीलर और प्राइवेट फोर-व्हीलर सेगमेंट में बढ़ती रुचि को देखते हुए, यह आंकड़ा जल्द ही पेट्रोल के करीब पहुंच सकता है।