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दिल्ली सरकार ने सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए नई सुविधाओं की घोषणा की

दिल्ली सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दो कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि ये केंद्र छोटे और सूक्ष्म उद्योगों को आधुनिक तकनीक और संसाधनों का लाभ उठाने में मदद करेंगे। इस परियोजना का उद्देश्य उद्यमियों को लागत में बचत और बेहतर उत्पाद गुणवत्ता प्रदान करना है। जानें इस पहल के पीछे के उद्देश्य और इसके संभावित लाभ।
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दिल्ली सरकार ने सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए नई सुविधाओं की घोषणा की

दिल्ली में औद्योगिक विकास के लिए नई पहल

नई दिल्ली - दिल्ली सरकार ने मंगलवार को राजधानी के औद्योगिक परिदृश्य में बदलाव लाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में बादली और बवाना के औद्योगिक क्षेत्रों में दो कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।


मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने इस निर्णय पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सरकार छोटे और सूक्ष्म उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। छोटे उद्यम अक्सर भारी निवेश की कमी के कारण आधुनिक तकनीक और महंगी मशीनों का उपयोग नहीं कर पाते। ये कॉमन फैसिलिटी सेंटर उनकी इस समस्या का समाधान करेंगे और उनके व्यवसाय में सहूलियत प्रदान करेंगे।


मुख्यमंत्री ने बताया कि यह परियोजना केंद्र सरकार की सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (एमएसई-सीडीपी) योजना के अंतर्गत लागू की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य एक ही छत के नीचे ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिन्हें व्यक्तिगत रूप से खरीदना छोटे उद्यमियों के लिए संभव नहीं होता। इन केंद्रों के माध्यम से सूक्ष्म और लघु उद्योगों को साझा मंच मिलेगा, जहां वे बिना भारी निवेश के आधुनिक मशीनों, परीक्षण प्रयोगशालाओं और प्रशिक्षण सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।


इस परियोजना की कुल लागत 60 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें प्रत्येक सेंटर पर 30 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएफसी के माध्यम से श्रमिकों के कौशल, तकनीकी प्रशिक्षण और उत्पाद गुणवत्ता सुधार की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही, पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट और टिकाऊ तकनीक से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।


मुख्यमंत्री ने बताया कि इन केंद्रों से क्लस्टर की इकाइयों को लागत में बचत होगी, विशेषकर माइक्रो और नई इकाइयों को बड़ा लाभ मिलेगा। साझा सेवाओं और सामूहिक खरीद से उत्पादन लागत में कमी आएगी और बाजार तक पहुंच मजबूत होगी। इससे न केवल उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और औद्योगिक क्लस्टरों का सतत विकास सुनिश्चित होगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के सूक्ष्म और लघु उद्यम आत्मनिर्भर बनें, आधुनिक तकनीक से जुड़ें और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान मजबूत करें। इस दिशा में सीएफसी परियोजनाएं एक मजबूत आधार प्रदान करेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि कैबिनेट द्वारा स्वीकृत यह निर्णय दिल्ली के औद्योगिक विकास को नई गति देगा और छोटे उद्यमियों के लिए विकास के नए अवसर खोलेगा।