नए साल में निवेशकों के लिए शेयर बाजार में गिरावट
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर
निवेशकों के लिए नए साल की शुरुआत निराशाजनक
भारतीय निवेशकों के लिए नए साल की शुरुआत अच्छी नहीं रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा नए टैरिफ लगाने की चेतावनी के बाद, भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है। इस सप्ताह चार कारोबारी दिनों में बीएसई सेंसेक्स में 1,580 अंक से अधिक की कमी आई है, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 1.7% गिरकर 25,900 के स्तर से नीचे चला गया है।
इस गिरावट के कारण बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप 7.19 लाख करोड़ रुपये घटकर 474 लाख करोड़ रुपये रह गया है। गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 780.18 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 84,180.96 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 263.90 अंक या 1.01 प्रतिशत गिरकर 25,876.85 पर बंद हुआ।
अमेरिका के दबाव से बाजार में हलचल
बाजार में घबराहट का एक प्रमुख कारण अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत पर रूसी तेल आयात को लेकर दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिका एक ऐसे विधेयक पर विचार कर रहा है जो रूसी आयात पर 500% तक शुल्क लगा सकता है, जिससे भारत जैसे देशों पर असर पड़ेगा। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि भारत ने इस मुद्दे पर अमेरिकी चिंताओं को दूर नहीं किया, तो भारतीय सामानों पर उच्च टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
बड़े शेयरों में बिकवाली का असर
इस गिरावट में प्रमुख भूमिका हेवीवेट स्टॉक्स की है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे बड़े शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई है, जो इस सप्ताह 4% तक गिर चुके हैं। इन शेयरों में गिरावट तकनीकी और सेटलमेंट गतिविधियों से प्रेरित है। मेटल इंडेक्स में 1.9% की गिरावट आई है, जबकि आईटी इंडेक्स भी 1% नीचे बंद हुआ।
वैश्विक राजनीतिक चिंताओं का प्रभाव
वैश्विक स्तर पर, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका असर कमोडिटी और तेल बाजारों पर पड़ सकता है। एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का रुख रहा, जहां जापान का निक्केई 1.2% और चीन का सीएसआई 300 इंडेक्स 0.8% गिरा।
