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नागपुर उपभोक्ता आयोग ने एक्सिस बैंक को सेवा में कमी के लिए फटकार लगाई

महाराष्ट्र के नागपुर में उपभोक्ता आयोग ने एक्सिस बैंक को एक ग्राहक को 5,000 रुपये वापस करने और 10,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला एक असफल एटीएम लेनदेन से संबंधित है, जिसमें ग्राहक को राशि डेबिट होने के बावजूद नकदी नहीं मिली। आयोग ने बैंक की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की और कहा कि ग्राहक को त्वरित राहत प्रदान करना बैंक की जिम्मेदारी है।
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नागपुर उपभोक्ता आयोग ने एक्सिस बैंक को सेवा में कमी के लिए फटकार लगाई

एक्सिस बैंक को उपभोक्ता आयोग की चेतावनी

महाराष्ट्र के नागपुर में उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी के मामले में एक्सिस बैंक को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने बैंक को निर्देश दिया है कि वह एक ग्राहक को 5,000 रुपये की राशि वापस करे और इसके साथ ही 10,000 रुपये का मुआवजा भी प्रदान करे।


यह मामला आठ साल पहले का है, जब ग्राहक ने एक एटीएम लेनदेन में 5,000 रुपये खो दिए थे। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि एटीएम से राशि डेबिट होने के बावजूद ग्राहक को नकदी नहीं मिली।


आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसे लेनदेन की जांच करना और ग्राहक को त्वरित राहत प्रदान करना बैंक की जिम्मेदारी है।


बैंक की लापरवाही पर आयोग की टिप्पणी

पिछले महीने के एक निर्णय में, आयोग ने पाया कि बैंक ने शिकायतकर्ता की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और लोकपाल प्रक्रिया के तहत उचित सुनवाई प्रदान करने में असफल रहा। यह असफल लेनदेन 19 अगस्त, 2018 को हुआ था। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने एक्सिस बैंक के एटीएम से 5,000 रुपये निकालने का प्रयास किया था।


मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष सतीश सप्रे और सदस्य मिलिंद केदार ने की, जबकि एक्सिस बैंक कानूनी नोटिस मिलने के बावजूद आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ।


आयोग ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता की बार-बार शिकायतों के बावजूद बैंक ने यह साबित करने के लिए कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया कि उसने मामले की उचित जांच की या एटीएम के निगरानी कैमरे की जांच की।


आयोग का निर्णय

आयोग ने यह स्पष्ट किया कि अभिलेखों से यह सिद्ध होता है कि बैंक ने शिकायतकर्ता की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। इसके अलावा, नोटिस मिलने के बाद भी बैंक ने कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।


आयोग ने माना कि ग्राहक के खाते से राशि कटने के बावजूद नकदी न मिलना बैंक की सेवा में कमी को दर्शाता है। अंततः, आयोग ने बैंक को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 5,000 रुपये लौटाए और मानसिक तथा शारीरिक उत्पीड़न के लिए 10,000 रुपये मुआवजा दे।