निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड ने गोल्ड फंड में किए नए बदलाव
सोने में निवेश के लिए नए नियम
मुंबई: सोने की चमक हर किसी को आकर्षित करती है, लेकिन यदि आप अपनी मेहनत की कमाई को गोल्ड म्यूचुअल फंड में लगाने का विचार कर रहे हैं, तो पहले ठहरें। निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड ने सोने से संबंधित अपनी दो प्रमुख योजनाओं में निवेश के लिए कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। एचडीएफसी और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के बाद, अब निप्पॉन इंडिया ने मौजूदा बाजार की स्थिति और सोने के आयात से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अपने गोल्ड फंड्स पर अस्थायी रोक लगा दी है।
नए नियमों की शुरुआत
8 जून से लागू होगा नियम
ये नए नियम 8 जून 2026 से प्रभावी होंगे और तब तक जारी रहेंगे। फंड हाउस के अनुसार, अब बड़े निवेशक 'निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीस' में एएमसी के माध्यम से सीधे नया निवेश नहीं कर सकेंगे। पहले 25 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन की अनुमति थी, लेकिन अब इसे रोक दिया गया है। हालांकि, अधिकृत प्रतिभागियों और मार्केट मेकर्स के लिए यह सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी।
निवेश पर कैपिंग लागू
अब निवेश पर लागू होगी कैपिंग
यदि आप 'निप्पॉन इंडिया गोल्ड सेविंग्स फंड' में निवेश करना चाहते हैं, तो अब एक पैन कार्ड पर महीने में अधिकतम 10 लाख रुपये का एकमुश्त निवेश, अतिरिक्त खरीदारी या स्विच-इन किया जा सकेगा। इसके अलावा, जो लोग एसआईपी या एसटीपी के माध्यम से निवेश कर रहे हैं, उनके लिए दैनिक अधिकतम सीमा 50 हजार रुपये प्रति पैन निर्धारित की गई है।
पुराने निवेशकों के लिए राहत
पुराने निवेशकों पर नहीं होगा असर
एक सकारात्मक पहलू यह है कि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ये प्रतिबंध केवल अस्थायी हैं। जो लोग पहले से एसआईपी या एसटीपी चला रहे हैं, उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और उनका निवेश जारी रहेगा। इसके साथ ही, आप जब चाहें अपने पैसे निकाल सकते हैं और स्टॉक एक्सचेंज पर Gold BeES की ट्रेडिंग भी सामान्य रूप से कर सकते हैं। 5 जून 2026 को दोपहर 3 बजे से पहले आए सभी आवेदनों को पुरानी एनएवी पर ही प्रोसेस किया जाएगा।
गोल्ड की कीमतों पर प्रभाव
सीमित रहेंगी गोल्ड की कीमतें
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में सोने की कीमतें एक सीमित दायरे में रह सकती हैं। वर्तमान में गोल्ड मार्केट पर दो प्रमुख कारक प्रभाव डाल रहे हैं: पहला, मध्य पूर्व की स्थिति और दूसरा, वैश्विक महंगाई की चिंता। यदि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने पर दबाव आ सकता है। इसलिए निवेशक इस समय सावधानी से कदम उठा रहे हैं।
