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निरंजन हीरानंदानी ने ट्रंप की तुलना हिटलर से की, मुंबई के विकास पर चर्चा

हीरानंदानी ग्रुप के प्रबंध निदेशक निरंजन हीरानंदानी ने एक कार्यक्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुलना हिटलर से की। उन्होंने कहा कि ट्रंप युद्ध की राह पर हैं और भविष्यवाणी की कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेगा। मुंबई में झोपड़ पट्टी की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि अगले 7 वर्षों में इसे समाप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, उन्होंने भारतीयों के प्रति भेदभाव और कौशल विकास की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जानें उनके विचारों का क्या महत्व है।
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निरंजन हीरानंदानी ने ट्रंप की तुलना हिटलर से की, मुंबई के विकास पर चर्चा

हीरानंदानी का विवादास्पद बयान


एक मीडिया चैनल के कार्यक्रम में, हीरानंदानी ग्रुप के प्रबंध निदेशक निरंजन हीरानंदानी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुलना हिटलर से की। उन्होंने कहा कि हिटलर ने युद्ध का सहारा लिया था और ट्रंप भी इसी राह पर चल रहे हैं।


अमेरिका का भविष्य

इस कार्यक्रम में मुंबई के विकास पर चर्चा करते हुए, हीरानंदानी ने कहा कि ट्रंप वर्तमान में सबसे शक्तिशाली नेता हैं। उन्होंने वेनेजुएला के खिलाफ युद्ध छेड़ा है और भविष्यवाणी की कि अगले महीने अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ट्रंप लक्ष्मण रेखा पार करते हैं, तो इसका गंभीर परिणाम होगा।


मुंबई में झोपड़ पट्टी का समाधान

हीरानंदानी ने मुंबई की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि शहर में 50 प्रतिशत लोग झोपड़ पट्टी में रहते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आश्वासन दिया है कि अगले 7 वर्षों में झोपड़ पट्टी समाप्त की जा सकती है। बुलेट ट्रेन और दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर के निर्माण से मुंबई में बदलाव आ रहा है।


भारतीयों के प्रति भेदभाव

मुंबई में भारतीयों के साथ भेदभाव पर हीरानंदानी ने कहा कि हमें उत्तर-दक्षिण या महाराष्ट्रियन के बारे में नहीं सोचना चाहिए। हमें कामकाजी लोगों की आवश्यकता है और शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने नेपाल में क्रांति का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां ग्रेजुएट्स के लिए नौकरियों की कमी थी।


कौशल विकास की आवश्यकता

उद्योगपति ने कहा कि देश में कौशल विकास पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 20 लाख कंस्ट्रक्शन स्किल्ड वर्कर्स की कमी है। एल एंड टी कंपनी को अकेले 25 हजार कुशल श्रमिकों की आवश्यकता है।


एआई का महत्व

एआई के विषय में उन्होंने कहा कि यह एक खतरा भी हो सकता है और रोजगार का साधन भी। यदि भारत 2026 तक एआई को अपनाने में विफल रहता है, तो वह बाजार से बाहर हो जाएगा। उन्होंने बताया कि जब कंप्यूटर भारत में आए थे, तब हड़तालें हुई थीं, लेकिन इसके बाद देश में बैंकों की संख्या में वृद्धि हुई।