नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की उड़ान सेवाएं जल्द शुरू होने की संभावना
नोएडा में बन रहे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से संबंधित नई जानकारी सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि व्यावसायिक उड़ानों का संचालन अगले डेढ़ से दो महीने में शुरू हो सकता है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने इस बात की पुष्टि की है कि सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद ही सेवाएं प्रारंभ होंगी। यह परियोजना उत्तर प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट है, जो रोजगार और व्यापार को बढ़ावा देने की उम्मीद रखती है।
| Mar 29, 2026, 23:03 IST
नोएडा हवाई अड्डे पर उड़ान सेवाओं की शुरुआत
नोएडा में बन रहे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से संबंधित एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है, जो यात्रियों के लिए सकारात्मक है। केंद्र सरकार के अनुसार, यहां से व्यावसायिक उड़ानों का संचालन अगले डेढ़ से दो महीने में शुरू हो सकता है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने जानकारी दी है कि आज से गिनती शुरू करते हुए लगभग 45 से 60 दिनों के भीतर नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ान सेवाएं प्रारंभ की जाएंगी। यह परियोजना लंबे समय से विकास के चरण में थी और अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
उड़ान संचालन शुरू होने से पहले सुरक्षा से संबंधित कुछ आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करना आवश्यक है। नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो को हवाई अड्डे के लिए सुरक्षा कार्यक्रम को मंजूरी देनी होती है, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था, जांच प्रक्रिया, प्रवेश नियंत्रण और आपात स्थिति से निपटने की योजना शामिल होती है।
अधिकारियों के अनुसार, जब तक सुरक्षा मंजूरी नहीं मिलती, तब तक हवाई अड्डे से जुड़े कर्मचारियों और अन्य हितधारकों को प्रवेश पास जारी नहीं किए जा सकते। इसलिए, संचालन शुरू करने की प्रक्रिया इस मंजूरी पर निर्भर है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने भी पुष्टि की है कि अगले 45 दिनों में सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जो दर्शाता है कि परियोजना तेजी से अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है।
शुरुआती चरण में, हवाई अड्डे से घरेलू और मालवाहक उड़ानें एक ही रनवे से संचालित की जाएंगी, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत बाद में चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।
यह हवाई अड्डा उत्तर प्रदेश और आस-पास के क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना मानी जा रही है, जिससे रोजगार, व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। भविष्य में, यह दिल्ली क्षेत्र के हवाई यातायात के दबाव को भी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
