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पंजाब के वित्त मंत्री ने जीएसटी दरों के तार्किकरण पर मुआवजे की आवश्यकता पर जोर दिया

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जीएसटी दरों के तार्किकरण पर केंद्र सरकार से उचित मुआवजे की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसका लाभ गरीबों तक पहुंचे, न कि केवल कॉर्पोरेट संस्थानों को। उन्होंने बाढ़ की स्थिति पर भी केंद्र से सहायता की अपील की। जानें इस मुद्दे पर उनके विचार और राज्य की वित्तीय स्थिरता के लिए उनकी चिंताएं।
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पंजाब के वित्त मंत्री ने जीएसटी दरों के तार्किकरण पर मुआवजे की आवश्यकता पर जोर दिया

पंजाब के वित्त मंत्री का बयान

पंजाब समाचार: पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) दरों को तार्किक बनाने के प्रस्ताव के तहत राज्यों की वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए उचित मुआवजे की व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया का लाभ महंगाई से जूझ रहे गरीबों तक पहुंचना चाहिए, न कि केवल कॉर्पोरेट कंपनियों तक।


राज्यों की वित्तीय सुरक्षा पर जोर

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कीमतों के तार्किकरण का प्रस्ताव बिना आय में कमी की भरपाई के लागू किया गया, तो यह राज्यों की वित्तीय अस्थिरता का कारण बन सकता है और देश की संघीय संरचना को भी नुकसान पहुंचा सकता है।


केरल में वित्त मंत्रियों की बैठक

केरल की बैठक में शामिल हुए


एडवोकेट चीमा ने कर्नाटक भवन में जीएसटी दरों के तार्किकरण पर चर्चा के लिए केरल, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के वित्त मंत्रियों की बैठक में भाग लिया। उन्होंने कहा कि दरों के तार्किकरण के साथ-साथ राज्यों के वित्तीय हितों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत व्यवस्था की आवश्यकता है। इसमें लग्जरी वस्तुओं पर अतिरिक्त कर लगाने और कम से कम पांच वर्षों तक मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात की गई।


वित्त मंत्री का वित्तीय नुकसान पर बयान

वित्त मंत्री बोले-


उन्होंने बताया कि 2017 में जीएसटी को वित्तीय निष्पक्षता के सिद्धांत के तहत लागू किया गया था, लेकिन इसके लागू होने के बाद राज्यों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है। पंजाब को जीएसटी लागू होने के बाद लगभग 1.11 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। हालांकि, केंद्र ने निर्धारित वर्षों में 60 हजार करोड़ का मुआवजा दिया, लेकिन बाकी नुकसान की भरपाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।


राज्यों की मांग पर चर्चा

मीडिया से बातचीत में, एडवोकेट चीमा ने कहा कि बैठक में राज्यों ने मांग की कि लग्जरी वस्तुओं, सिगरेट और शराब पर अतिरिक्त कर लगाया जाए और उससे होने वाली आय राज्यों को दी जाए, ताकि दरों के तार्किकरण से होने वाली आय में कमी की भरपाई की जा सके।


राज्यों की जिम्मेदारियों पर विचार

वित्त मंत्री जिम्मेदारियों को कैसे निभाए?


उन्होंने कहा कि बिना आय स्थिरता के, राज्य अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को कैसे निभा सकते हैं। केंद्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी बोझ राज्यों पर न डाला जाए और आय के स्रोत केंद्रीय दायरे में न खींचे जाएं। यदि राज्य वित्तीय रूप से मजबूत होंगे, तभी देश भी मजबूत होगा।


बाढ़ की स्थिति पर प्रतिक्रिया

बाढ़ की स्थिति पर क्या बोले?


बाढ़ की स्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में, उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस प्राकृतिक आपदा के समय राज्य की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। पंजाब सरकार बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए पूरी कोशिश कर रही है और राज्य में हुए नुकसान का आकलन होने के बाद केंद्र से विशेष पैकेज की मांग की जाएगी।