पाकिस्तान का तेल संकट: युद्ध के चलते बढ़ता आयात बिल और महंगाई का संकट
पाकिस्तान पर युद्ध का असर
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का प्रभाव पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है, लेकिन इसका सबसे गंभीर असर पाकिस्तान पर पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल की आपूर्ति में रुकावट के कारण कच्चे तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे पाकिस्तान का मासिक तेल आयात बिल 600 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने इस संकट पर चिंता व्यक्त की है, जबकि आम जनता बढ़ती तेल कीमतों से परेशान है। सरकार IMF से पेट्रोलियम लेवी में राहत की मांग कर रही है।
ईंधन बचत के उपायों की आवश्यकता
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने ईंधन की बचत के उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया है ताकि मौजूदा रिजर्व को लंबे समय तक बनाए रखा जा सके। हाल ही में, पाकिस्तान ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि की है, जो आम लोगों के लिए एक बड़ा झटका है।
फाइनेंस मिनिस्टर की बैठक में चिंता
एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने रविवार को एक बैठक में बताया कि वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पाकिस्तान का मासिक तेल आयात बिल 600 मिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है। इस बैठक में पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक और सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह भी शामिल थे। औरंगजेब ने कहा कि सरकार वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर नजर रख रही है और बढ़ती कीमतों के वित्तीय प्रभाव से निपटने के लिए वैकल्पिक योजनाएं तैयार कर रही है। यदि संघर्ष बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि
पाकिस्तान में तेल की बढ़ती कीमतों के चलते सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल के दामों में 55 PKR प्रति लीटर की वृद्धि की है, जो लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। नए रेट्स के अनुसार, पेट्रोल की कीमत 321.17 PKR प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 335.86 PKR प्रति लीटर हो गई है। पेट्रोलियम मंत्री ने ईंधन बचाने के उपायों पर जोर दिया और कहा कि सोमवार को तीन पेट्रोलियम शिपमेंट आने की उम्मीद है, लेकिन LNG सप्लाई में भी रुकावट आ सकती है।
वैकल्पिक रूट्स और IMF से मदद
मलिक ने बताया कि ओमान, सऊदी अरब और UAE के साथ कूटनीतिक बातचीत जारी है, और होर्मुज स्ट्रेट के अलावा अन्य फ्यूल सप्लाई रूट्स सुनिश्चित करने की कोशिशें की जा रही हैं। पेट्रोलियम लेवी में राहत के लिए इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड से अनुरोध करने की योजना है। बढ़ते आर्थिक दबाव में पाकिस्तान फिर से IMF की शरण में जाने को मजबूर दिख रहा है, जबकि जनता महंगाई और ईंधन संकट से जूझ रही है।
