पाकिस्तान में गेहूं उत्पादन में गिरावट से खाद्य सुरक्षा पर खतरा
पाकिस्तान में गेहूं उत्पादन की चिंता
इस वर्ष पाकिस्तान में गेहूं के उत्पादन को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। हालिया जानकारी के अनुसार, देश को उत्पादन में संभावित कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है.
उत्पादन में कमी का अनुमान
अमेरिकी कृषि विभाग की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का गेहूं उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 से 22 लाख टन तक घट सकता है। यह आंकड़ा नीति-निर्माताओं के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि गेहूं और उससे बने उत्पाद जैसे रोटी, नान और ब्रेड देश की बड़ी जनसंख्या के दैनिक आहार का मुख्य हिस्सा हैं.
घरेलू उपभोग पर निर्भरता
पाकिस्तान चावल और मक्का का बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, लेकिन घरेलू उपभोग के लिए गेहूं पर उसकी निर्भरता अधिक है। ऐसे में उत्पादन में 20 लाख टन से अधिक की कमी खाद्य असुरक्षा को और बढ़ा सकती है.
सुरक्षा स्थिति का प्रभाव
यह स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि पाकिस्तान इस समय अफगानिस्तान के साथ बढ़ते तनाव और सीमावर्ती अस्थिरता का सामना कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा हालात का कृषि गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जो गेहूं उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं.
उत्पादन में गिरावट के कारण
उत्पादन में कमी के पीछे कई कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख लंबे समय तक चला सूखा और वर्षा की कमी है। पाकिस्तान मौसम विभाग के अनुसार, 2025 की शुरुआत में वर्षा औसत से लगभग 39 प्रतिशत कम रही, जिसका प्रभाव विशेष रूप से वर्षा-आधारित खेती वाले क्षेत्रों में देखा गया.
सरकारी नीतियों का असर
इसके अलावा, 2025–26 सीजन के लिए समर्थन मूल्य की घोषणा में देरी ने भी किसानों को असमंजस में डाल दिया है। कई किसानों ने अनिश्चितता के कारण कम बुवाई की, जिससे कुल उत्पादन प्रभावित हुआ है. बढ़ती लागत और सीमित सरकारी सहायता ने खेती को कम लाभकारी बना दिया है.
पंजाब में जल संकट
पंजाब, जिसे पाकिस्तान का 'गेहूं कटोरा' कहा जाता है, इस संकट का केंद्र है। यहां सिंचाई व्यवस्था पर जल संकट का दबाव स्पष्ट है. विशेषज्ञों का कहना है कि सिंधु नदी तंत्र में जल प्रवाह में कमी और सीमित जल भंडारण क्षमता ने हालात को और जटिल बना दिया है.
जल संधि से जुड़े तनाव
कुछ विश्लेषक 1960 के सिंधु जल संधि से जुड़े हालिया तनावों को भी अप्रत्यक्ष कारक मानते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, नदी जल डेटा साझा करने में बाधा और प्रवाह में लगभग 20 प्रतिशत कमी से जल प्रबंधन प्रभावित हुआ है, जिससे तरबेला और मंगला जैसे प्रमुख बांधों पर दबाव बढ़ा है.
आटे की कीमतों में वृद्धि
इस बीच, आटे की कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है। फरवरी 2026 के अंत तक 10 किलो आटे की कीमत कई शहरों में 890 से 1500 पाकिस्तानी रुपये के बीच रही, जबकि 20 किलो का बैग 1780 से 1810 रुपये तक बिक रहा है. प्रीमियम चक्की आटा 160 से 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ रही हैं.
आर्थिक विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उत्पादन में अनुमानित गिरावट वास्तविकता बनती है, तो सरकार को आयात पर निर्भर होना पड़ सकता है। हालांकि, विदेशी मुद्रा भंडार और महंगाई की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह एक आसान विकल्प नहीं है.
भविष्य की संभावनाएँ
कुल मिलाकर, सूखा, जल संकट, नीतिगत देरी और क्षेत्रीय अस्थिरता का संयुक्त प्रभाव पाकिस्तान के गेहूं उत्पादन पर पड़ रहा है। आने वाले महीनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह बारिश, सरकारी हस्तक्षेप और क्षेत्रीय हालात पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता गहरी होती दिख रही है.
