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फिरोजाबाद का कांच उद्योग संकट में: गैस की कमी से उत्पादन प्रभावित

फिरोजाबाद का कांच उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है, जहां गैस की कमी के कारण उत्पादन में भारी गिरावट आई है। चार सौ साल पुरानी कांच निर्माण परंपरा वाले इस शहर में हजारों श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं। मध्य पूर्व में संघर्ष के चलते गैस की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। निर्यात में भी कमी आई है, और परिवहन लागत में वृद्धि ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। यदि हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो पूरा उत्पादन सीजन प्रभावित हो सकता है।
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फिरोजाबाद का कांच उद्योग संकट में: गैस की कमी से उत्पादन प्रभावित

फिरोजाबाद में कांच उद्योग की स्थिति

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में कांच उद्योग वर्तमान में गंभीर संकट का सामना कर रहा है। यह शहर चार सौ साल पुरानी कांच निर्माण परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अब यहां की भट्टियां धीमी पड़ गई हैं, जिससे हजारों श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है.


गैस की कमी का प्रभाव

इस संकट का मुख्य कारण गैस की कमी है, जो कांच उद्योग के लिए अत्यंत आवश्यक है। कांच बनाने के लिए भट्टियों को लगातार एक हजार डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर चलाना पड़ता है, और गैस की आपूर्ति में कमी उत्पादन को सीधे प्रभावित करती है.


मध्य पूर्व में संघर्ष का असर

मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण गैस की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे कई उद्योग प्रभावित हुए हैं। भारत में गैस का उपयोग उद्योग, परिवहन और घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर होता है, इसलिए आपूर्ति में कमी का सबसे पहले असर उद्योगों पर पड़ता है.


उत्पादन में गिरावट

फिरोजाबाद में आमतौर पर इस समय उत्पादन अपने उच्चतम स्तर पर होता है, लेकिन अब भट्टियां बंद हैं और श्रमिक खाली बैठे हैं। कई कारीगर मोबाइल फोन पर समय बिता रहे हैं क्योंकि उनके पास काम नहीं है.


रोजगार संकट

एक भट्ठी संचालक ने बताया कि जहां पहले 500 से अधिक लोग काम करते थे, अब वहां 200 से भी कम लोग काम कर पा रहे हैं। छोटे कारीगरों ने अपनी इकाइयां बंद कर दी हैं और गैस की उपलब्धता का इंतजार कर रहे हैं.


संकट का व्यापक प्रभाव

फिरोजाबाद के कांच उद्योग से लगभग दो लाख लोग सीधे जुड़े हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से यह संख्या पांच लाख तक पहुंचती है। इस संकट का प्रभाव बड़े पैमाने पर देखा जा रहा है.


उत्पादन सीजन का खतरा

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो पूरा उत्पादन सीजन खत्म हो सकता है। मार्च की शुरुआत से गैस की आपूर्ति में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है, जिससे उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट आई है.


निर्यात में कमी

निर्यात के मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक है। पिछले महीने कांच उत्पादों का निर्यात लगभग 20 प्रतिशत तक गिर गया है। कई निर्माता, जो अमेरिका और यूरोप को सामान भेजते हैं, उनके उत्पादन में एक तिहाई की कमी आई है.


परिवहन की चुनौतियां

मार्च से अगस्त के बीच आमतौर पर त्योहारों के लिए बड़े ऑर्डर तैयार किए जाते हैं, लेकिन इस बार स्थिति अलग है और मार्च में एक भी कंटेनर बाहर नहीं जा सका है. इसके अलावा, मध्य पूर्व के समुद्री रास्तों पर तनाव के कारण परिवहन और बीमा लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिससे निर्यात महंगा हो गया है.


आपूर्ति व्यवस्था पर निर्भरता

यूरोप भेजे जाने वाले कंटेनरों की लागत 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई है, जबकि खाड़ी देशों को निर्यात लगभग ठप हो गया है. कई जगहों पर माल बंदरगाहों पर फंसा हुआ है.


अन्य उद्योगों पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत एशिया के उन देशों में शामिल है जो इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि देश की आपूर्ति व्यवस्था समुद्री मार्गों पर काफी निर्भर है. यह संकट केवल कांच उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि कपड़ा और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में भी असर देखने को मिल रहा है.