बकरीद पर बकरों की कीमतों में भारी वृद्धि, महंगाई का असर
बकरीद का त्योहार और महंगाई का प्रभाव
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच, भारत में महंगाई का असर बकरीद के त्योहार पर भी देखने को मिल रहा है। इस साल बकरीद पर कुर्बान किए जाने वाले बकरों की औसत कीमत में पिछले वर्ष की तुलना में कम से कम 15,000 रुपये की वृद्धि हुई है।
पशु व्यापारियों का कहना है कि बकरों की कीमतों में वृद्धि के कई कारण हैं, जिनमें मटन और चारे की कीमतों में बढ़ोतरी शामिल है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में गाय और भैंस की कुर्बानी पर सख्त नियम लागू होने के कारण बड़ी संख्या में बकरा व्यापारी वहां चले गए हैं, जिससे अन्य बाजारों में बकरों की उपलब्धता कम हो गई है।
कुर्बानी के लिए पात्रता और चांदी की कीमत
चांदी की बढ़ती कीमतों के कारण ईद उल अजहा पर कुर्बानी कराने के लिए पात्र लोगों की संख्या में कमी आई है। इस्लामी विद्वानों के अनुसार, बकरीद पर कुर्बानी के लिए पात्रता इस बात पर निर्भर करती है कि किसी व्यक्ति के पास 612 ग्राम चांदी या उसके बराबर धनराशि है या नहीं।
ईद उल अजहा, जिसे बकरीद भी कहा जाता है, इस साल 28 मई को मनाया जाएगा। इस दिन का महत्व इस्लामिक मान्यता के अनुसार पैगंबर हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में है।
बकरों की कीमतों में वृद्धि का कारण
फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने बताया कि जिनके पास 612 ग्राम चांदी या उसके बराबर धनराशि है, उनके लिए बकरीद पर कुर्बानी कराना अनिवार्य है। यह शर्त पुरुषों और महिलाओं दोनों पर समान रूप से लागू होती है।
हालांकि, पिछले एक वर्ष में चांदी की कीमत में भारी वृद्धि हुई है, और दिल्ली में चांदी के दाम 2.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। पुरानी दिल्ली के मीना बाजार में बकरा खरीदने आए गुलफाम ने बताया कि उसके परिवार में इस साल केवल दो लोग कुर्बानी देने के पात्र हैं, जबकि पिछले साल सभी पात्र थे।
बकरों की बढ़ती कीमतें और व्यापारियों की राय
गुलफाम के अनुसार, पिछले साल चांदी की कीमत के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के पास लगभग 60 से 65 हजार रुपये की बचत होती थी, तो वह कुर्बानी के लिए पात्र माना जाता था। लेकिन इस वर्ष चांदी की कीमत बढ़ने से यह सीमा बढ़कर लगभग पौने दो लाख रुपये हो गई है।
पुरानी दिल्ली में मोटर का काम करने वाले गुलफाम ने कहा कि उसका बजट 15-20 हजार रुपये है, लेकिन बकरों की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं और 30-35 हजार रुपये से कम में कोई बकरा नहीं मिल रहा है। जाफराबाद की मंडी में किताब विक्रेता सलमान ने बताया कि इस बार औसत बकरों की कीमत पिछले साल की तुलना में लगभग 15,000 रुपये अधिक है।
बकरा व्यापारियों की स्थिति
बरेली के बकरा व्यापारी फिदा हुसैन ने ऊंची कीमतों के बारे में बताया कि कई बकरा व्यापारी पश्चिम बंगाल चले गए हैं, जहां नए नियमों के कारण गाय और भैंस की कुर्बानी पर सख्ती है। इस कारण वहां बकरों की मांग बढ़ गई है, जिससे दिल्ली और उत्तर भारत में बकरों की कीमतें बढ़ी हैं।
संभल के पशु व्यापारी रेहान ने कहा कि चारे और मटन की कीमतों में वृद्धि के कारण भी बकरों की कीमतें महंगी हो गई हैं।
